Electronics Commerce in Hindi by unitdiploma

Electronics Commerce
Electronics Commerce advantages and disadvantages
E-Commerce Business model B2B, B2C, C2C, E-Governance
Four C’s (Convergence, collaborative
computer content management and call center
Supply Chain Management
benefits (advantage) of Supply Chain Management
Electronics commerce advantages:-
Types of e commerce
Electronics Commerce in hindi

Electronics Commerce :- इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स इंटरनेट पर वस्तुओ और सेवाओ के खरीद या बिक्री की प्रक्रिया होता है इसमे जो काम हम ऑफलाइन करते है इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स मे वही कार्य ऑनलाइन इंटरनेट पर करते है ,इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स की शुरुवात 1960 ई  मे हुआ था ,इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स दो या दो से अधिक व्यक्तियों के डेटा या धन को इलेक्ट्रॉनिक्स रूप एक दूसरे से स्थानांतरित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स का प्रयोग किया जाता है इसे e-commerce भी कहते है/

  • Online shopping
  • Electronic payment
  • Internet banking
  • Online ticketing 

Online shopping:- जब वस्तुओ को  खरीद या बिक्री की प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स से किया जाता है उसे ही ऑनलाइन शॉपिंग कहते है 

“जब कोई समान या वस्तुओ को इंटरनेट पर खरीद या बिक्री हो उसे ही ऑनलाइन शॉपिंग कहते है ”

जैसे :- Amazon,Flipkart,Snapdeal,etc

Electronic payment:- internet पर पेमेंट करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स पेमेंट का प्रयोग किया जाता है ,इलेक्ट्रॉनिक्स पेमेंट डिजिटल रूप से पेमेंट करने का एक माध्यम होता है इलेक्ट्रॉनिक्स पेमेंट कैश लेस पेमेंट होता है

“जब भी Online या Offline सामना खरीदे जाने के बाद ग्राहक Payment करता है जिससे ग्राहक के Account से रूपये विक्रेता के Account में Transfer हो जाते है लेकिन जब Payment में केवल आकड़ों या Digital Signal का ही Transfer होता है तो इस प्रकार किये गए Payment को Electronic Payment कहा जाता है.”

जैसे :- डेबिट कार्ड ,क्रेडिट कार्ड,एटीएम ,प्रीपेड कार्ड/

Internet banking:-  इंटरनेट बैंकिंग  के माध्यम से बैंक-ग्राहक  अपने कंप्यूटर द्वारा अपने बैंक नेटवर्क और वेबसाइट का प्रचालन कर सकते है। इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ है कि कोई भी व्यक्ति घर या कार्यालय या कहीं से भी से बैंक सुविधा का लाभ उठा सकता है। ऑनलाइन बैंकिंग इंटरनेट पर बैंकिंग संबंधी मिलनेवाली एक सुविधा है, जिसके माध्यम से कंप्यूटर का इस्तेमाल कर उपभोक्ता बैंकों के नेटवर्क्स और उसकी वेबसाइट पर अपनी पहुंच बना सकता है और घर बैठे ही खरीददारी, पैसे का स्थानांतरण के अलावा अन्य तमाम कार्यों और जानकारी के लिए बैंकों से मिलने वाली सुविधा का लाभ उठा सकता है

जैसे :-State Bank Of India, ICICI Bank, Punjab National Bank, Axis Bank ,Union Bank, HDFC Bank,Central Bank of India, Bank of Baroda,etc

Online ticketing :- ऑनलाइन टिककटिंग का प्रयोग कर  इंटरनेट पर ticket काटने के लिए किया जाता है/

जैसे :- ट्रेन की टिकट ऑफलाइन मिलता है लेकिन ऑनलाइन टिककेटिंग के जरिये हम घर बैठे ट्रेन टिकिट बूक कर सकते है 

Electronics commerce advantages:-

  • ई-कॉमर्स उपभोक्ताओं को सस्ते तथा क्वालिटी प्रोडक्ट्स को देखने का मौका देता है 
  • यह नेशनल तथा इंटरनेशनल दोनों मार्केट में बिजनेस एक्टिविटीज की डिमांड को बढाता है
  • इजी रिटर्न पॉलिसी
  • इसके माध्यम से छोटे एंटरप्राइजेज प्रोडक्ट्स की खरीददारी, बेचना तथा सर्विस के लिए ग्लोबल मार्केट में एक्सेस कर सकते है
  • प्रोडक्ट या कीमत की तुलना कर सकते हैं
  • पेमेंट आसानी से कर सकते हैं
  • ई-कॉमर्स, बिजनेस में या व्यक्तिगत रूप से 24×7 के रूप में मार्केट में एक्सेस करने की सुविधा को प्रदान करता है | इस तरह यह बिजनेस में sales तथा प्रॉफिट को बढ़ावा देता है |

Electronics commerce disadvantages:-

  • ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीदते समय कई चिजों के हैक होने का खतरा होता है
  • ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीदते समय हम प्रोडक्ट को फिजिकलि नहीं देख सकते है
  • ऑनलाइन खरीदे प्रोडक्ट की डिलिवरी ऑफलाइन खरीदे प्रोडक्ट की तुलना लेट होता है
  • उपभोक्ताओ को यह समझने में असफलता होती है की वे ई-कॉमर्स के माध्यम से खरीददारी कैसे करे
  • कॉमर्स venture मुख्य रूप से third party पर निर्भर करता है | अर्थात हम बिना इन्टरनेट के ग्लोबल मार्केट में एक्सेस नही कर सकते है | इन्टरनेट third party के रूप में role को play करता है

Types of e commerce:- E commerce निम्नलिखित प्रकार होते है

  • Business to Business (B2B)
  • Business to consumer(B2C)
  • Consumer to Consumer(C2C)
  • Business to Government(B2G)
  • Business to Business (B2B):- एक व्यापारी से दूसरे व्यापारी के बीच लेनदेन करने के लिए Business to Business मोडेल का प्रयोग किया जाता है

 जैसे:-कोई कंपनी खुद कोई प्रोडक्ट नही बनाती है और किसी दूसरी कंपनी से खरीद कर फिर अपना समान बेचती है तो वो B2B के अंतर्गत आता है 

  • Business to consumer(B2C):-इस  ई कॉमर्स मे एक बिसिनेस और consumer  के बीच लेनदेन होता है ,बिजनेस मैन और seller के बीच को लेनदेन होता है

जैसे :- Flipkart and Amazon,etc

  • Consumer to Consumer(C2C):- यह दो Consumers यानी दो उपभोक्ताओं के बीच लेनदेन होता है । इसमे दो उपभोक्ताओं द्वारा आपस में कुछ खरीदा और बेचा जाता है। 

जैसे :- eBay, OLX

  • E Governance:-  इस प्रकार में कंपनियों या consumer(कोंसुमर) सार्वजनिक प्रशासन या सरकार के बीच ऑनलाइन किए गए सभी लेनदेन शामिल हैं। खासतौर पर वित्तीय, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार, कानूनी दस्तावेज और रजिस्ट्रार आदि 

जैसे:- GST

Four C’s (Convergence, collaborative, computer content management and call center)

  • Convergence
  • collaborative
  • computer content management 
  • call center
  • Convergence(साथ मिलकर काम करना ):- ई कॉमर्स मे कंवर्जेंस का प्रयोग अधिक लोग किसी कार्य को एक साथ मिलकर कैसे करते है,

उदाहरण के लिए: – इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक व्यापार, सेल फोन प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटरीकृत फिल्म गतिविधि, स्ट्रीमिंग संगीत और वीडियो उच्च परिभाषा टीवी (एचडीटीवी, 3 डी, 4 डी) वीडियो गेम फ्रेमवर्क

  • Collaborative( सहयोग ):- ई कॉमर्स मे दो या अधिक व्यक्तियों या बिजनेस का मिलकर काम करना ही सहयोग कहलाता है, सहयोग की प्रक्रिया में ज्ञान का बारंबार तथा सभी दिशाओं में आदान-प्रदान होता है/
  • computer content management(सामग्री प्रबन्धन प्रणाली):-ऐसा कम्प्यूटर अनुप्रयोग है जो भिन्न-भिन्न प्रकार के डिजिटल मिडिया इलेक्ट्रानिक टेक्स्ट का सृजन करने, सम्पादन करने, प्रबन्धन करने, खोजने एवं प्रकाशित करने के काम आता है। प्रबन्ध करने के योग्य सामग्री में कम्प्यूटर संचिकाएँ, छबियाँ (इमेजेज), ऑडियो संचिकाएँ, विडियो संचिकाएँ, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज तथा वेब-सामाग्री आदि हो सकती है। “वेब कन्टेन्ट मनेजमेन्ट”, “डिजिटल असेट मैनेजमेन्ट”, “डिजिटल रेकार्ड्स् मैनेजमेन्ट”, “इलेक्ट्रानिक कन्टेन्ट मैनेजमेन्ट” आदि इसके अन्य नाम हैं।
  • call center:- हम अपनी समस्या के समाधान के लिए कस्टमर केयर में कॉल करते है। कस्टमर केयर में कॉल करना मतलब Call Center में कॉल करना होता है। आज सभी कंपनियां अपने ग्राहकों को बेहतरीन कस्टमर सर्विस देना चाहती है। इसलिए वह Call Center की मदद लेते है।

Supply chain management:- Supply chain management मे प्रोडक्ट को मैनेज  किया जाता है,और स्टाक को मैनेज किया जाता है जिसमे सही प्रोडक्ट को सही समय मे उपभोक्ता को डिलीवर किया जाता है Supply chain management चैन की प्रक्रिया उत्पादक से थोक विक्रेता से फुटकर विक्रेता से ग्राहक तक प्रोडक्ट पहुचाने की प्रक्रिया है,इसे scm कहते है /

जैसे :- प्रोडक्ट की जानकारी ,प्रोडक्ट टाइटल ,आदि 

• supplier (आपूर्तिकर्ता):- एक supplier जो है वह raw material उपलब्ध कराता है जिससे कि
प्रोडक्ट का निर्माण किया जाता है.
supplier जो है वह vendor से पूरी तरह भिन्न होता है, supplier किसी कंपनी को raw materials सप्लाई करता है जबकि vendor प्रोडक्ट्स को customers को बेचता है.

• manufacturer (उत्पादक):- एक उत्पादक वह होता है जो आपूर्तिकर्ता से raw material प्राप्त
करता है तथा उससे प्रोडक्ट का निर्माण करता है.

• customer (ग्राहक):- ग्राहक वह होता है जो निर्मित हुए प्रोडक्ट को प्राप्त करता है तथा यह
सप्लाई chain का अंतिम लिंक होता है.

benefits (advantage) of Supply Chain Management:-

इसके निम्नलिखित लाभ है:-

1:- इसमें डेटा ट्रान्सफर ऑनलाइन होता है जिससे कागजी कार्यवाही नही करनी पडती है.

2:- इससे wholeseller तथा distributor संतुष्ट होते है क्योंकि प्रोडक्ट सही समय में सही व्यक्ति को प्राप्त होता है.

3:- इसमें गलतियों की सम्भावना बहुत कम होती है.

4:- यह बहुत सस्ता है.

5:- इसमें प्रोडक्ट की डिलीवरी की गति बहुत तेज होता  है.

6:- क्वालिटी बहुत ही अच्छी होती है.

7:- एक कुशल SCM क्वालिटी को बनाये रखता है तो वह कस्टमर को satisfy कर देता है.

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