Social Media Marketing in hindi by unitdiploma

Social Media Marketing ,     

Social Media Marketing Strategy : Setting up Goals- Finding out where your targeted people connect, Popular Social Media Networks, KnowEm – Check Social Media Username Availability,  Knowing your Audience – Google Alerts – Monitoring your brands, competitions, and industry trends using, TweetDeck – a monitoring tool similar to Google Alerts for Twitter, Hashtags – Best Practices & Tools, Facebook / Instagram / LinkedIn- Setting up a Facebook Business Page, Facebook Graph Search – SEO for Facebook, Facebook Fans vs Talking about this, Promoting your Page, Boost Post, Facebook/Instagram Advertising using Facebook Ads Manager, Remarketing/Retargeting using Facebook Custom Audiences, LinkedIn Advertising: Text Ads | Sponsored Content, Measuring Success- Fans, Likes, Comments & Share, Track performance using Google Analytics, UTMs – URL Builder, Bounce Rate, Time Spent on Site and Conversions!, Tracking Offline Conversions, Tracking your emails, Viral Videos Examples, Instagram, Facebook and Pinterest – Best Practices, Tips and Tools

  1. Social Media Marketing:- social sites पर हम अपनी blog, Brand या product को promote करने के लिए जो भी strategy apply करते है उसे social media marketing कहते है. 

पहले marketing करने के लिए Newspaper, TV, Posters शिर्फ़ यही option थे. जिसे किसी भी company को grow करने में बहुत time लग जाता था.But अभी अपने product को marketing करने के लिए internet सबसे best Place है. और social media sites से आप Unbelievable visitors और customers received कर सकते हो.

Social Media Marketing  Best Sites:- Online Marketing के लिए Social media as marketing tool सबसे Best Choice है. ऐसे popular social sites के बारे में आप जानेगे जहा पर marketing करके आप अपनी business को बहुत ही fast grow कर सकते हो.

Facebook

World की सबसे popular social network site है Facebook. जहा पर anytime आपको million users active मिलेंगे. और अगर आप शिर्फ़ India जो कि second largest online market हे यहा पर भी आपको monthly 241 million + active users मिलेंगे.

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और Facebook पर marketing के लिए आपको Facebook Tips & Tricks के बारे में जानना होगा. और अपनी Brand की एक page create करना होगा फिर आप इसपर free और paid जैसे भी अपनी blog या product की promotion कर सकते हो

Twitter

ये भि एक बहुत ही बढ़िया social networking sites है. इसपर आप 140 character में अपनी products के बारे में बता सकते हो. और अपनी Brand को अपने followers को show करके अपनी content को promotion कर सकते हो

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LikedIn

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LikedIn के बारे में आप जानते ही होंगे. ये भी एक professional network site है. और इसपर आपको शिर्फ़ professional लोग ही ज्यादा मिलेंगे. तो इस social media site पर भी आप अपनी content को promote करके अपनी business की Promotion कर सकते है.

YouTube

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Digital marketing के लिए के लिए YouTube भी एक बहुत ही बढ़िया social media site है. इसपर आप अपनी blog को promote करने के लिए video create करे और videos पर अपनी products के बारे में बताए. जिसे आप बहुत से लोगो को attract कर सकते हो. और अपनी blog पर traffic भी increase कर सकते हो.

Pinterest

अपने content की image create करके अगर आप pinterest site पर share करेंगे तो भी आप बहुत से users को अपनी business के बारे में बता सकते है. Pinterest पर marketing करने लिए आपको इसपर अपनी content की infographics type की image create करके share करना होगा. इसे आप बहुत से visitors को attract कर सकते हो.

Instagram

Instagram भी एक बहुत ही popular photo sharing social site है. इसपर  आप अपनी content की images, Video share करे. जिससे भी आप बहुत से unique visitors received कर सकते हो अपनी blog पर.

तो ये थी कुछ popular Social sites जिनपर आप अपनी blog की Advertisement कर सकते हो. और अपनी products की selling increase कर सकते है.

Google Alerts:- google ने साल 2003 में अपनी इस सर्विस गूगल एलर्ट को लॉन्च किया था। यह गूगल की एक फ्री सर्विस है। इसको यूज़ करने के लिए किसी भी तरह का भुगतान नहीं करना पड़ता है। इसका यूज़ यूज़र्स अपनी पसंदीदा चीज का अलर्ट पाने के लिए करता है। आजकल इंटरनेट का इस्तेमाल हरेक देश के हरेक गांव में होने लगा है। 

ऐसे में इंटरनेट पर कंटेंट की संख्या भी काफी बढ़ गई है। रोजाना दुनियाभर के करोड़ों लोग करोड़ों कंटेंट इंटरनेट पर पोस्ट करते हैं। ऐसे में यूज़र्स के लिए हर कंटेंट को देखना या उसपर नजर रखना काफी मुश्किल हो जाता है। इस सर्विस का इस्तेमाल करके यूज़र्स इंटरनेट पर अपनी पसंदीदा कंटेंट के लिए एक खास गूगल अलर्ट सेट कर सकता है। इसके बाद यूज़र्स अपने उस पसंदीदा चीज के बारे में सभी जानकारी टाइम पर ले पाएग और उसे बार-बार इंटरनेट पर अपनी पसंदीदा कंटेंट ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी

google अलर्ट कैसे सेट करें…? 

 1: https://www.google.co.in/alerts पर जाएं। 

2: अब आपको गूगल अकाउंट पर लॉगिन करना होगा। अगर आप पहले से लॉगिन होंगे तो कोई जरूरत नहीं है। 

3: अब अगर आप पहली बार गूगल पर लॉगिन कर रह हैं तो आपको अपने पसंदीदा टॉपिक का नाम लिखना होगा और अगर आप पहले से जीमेल यूज़ करते हैं तो आपके सामने आपके द्वारा ज्यादातर यूज़ किए जाने वाले टॉपिक में पसंदीदा ऑप्शन का विकल्प मिलेगा। वहां पर आपको कंपनी, मूवी, न्यूज़ सेक्शन, फाइनेंस, टेक्नोलॉजी जैसे कई कैटेगिरी ऑप्शन मिलेंगे। आप अपने पसंदीदा विकल्प को चुनें।   

4: अपना जीमेल आईडी चुनने के बाद आपको Show Options का ऑप्शन दिखेगा, उसपर क्लिक करें। 

 5: Show Options पर क्लिक करने के बाद कुछ और ऑप्शन मिलेंगे, उसे आप अपने अनुसार सेट कर लें। 

 6: अब आप How Often पर जाकर चुनें कि आपको कितनी बार और कब-कब गूगल अलर्ट चाहिए। 

7: Sources ऑप्शन पर जाएं और आपको अलर्ट किस तरीके का चाहिए ऑटोमैटिक या मैन्यूल, उसे चुनें। स

8: अब आप जिस भाषा में अलर्ट प्राप्त करना चाहते हैं, उस भाषा का चयन करें। 

 9: अब आपको क्षेत्र का चयन करना होगा। आप अगर सिर्फ अपने देश का न्यूज़ चाहते हैं तो Region में जाएं और Country में इंडिया में को चुनें। अगर आप हर जगह के बारे में अलर्ट पाना चाहते हैं तो Any Region चुन सकते हैं। 

10: अब वहां How Many के अंदर आपको दो ऑप्शन दिखाई देंगे। पहला All Results और दूसरा Best Results। आप किसी एक को चुनें। 

11: अब आपको अलर्ट कहां चाहिए वो चुनना पड़ेगा। इसके लिए आपको Deliver To ऑप्शन के अंदर जाकर उस जीमेच आईडी को चुनना पड़ेगा, जिसमें आप अलर्ट पाना चाहते हैं। 

 12: अब अंतिम में आप Create Alert का ऑप्शन चुन लें यानि क्लिक कर दें।
Hashtags:- Hashtags  (#) एक चिन्ह है  hashtag सबसे पहले 2007 मे इस्तेमाल किया गया था पर उस समय इस पर किसी ने इतना ध्यान  नहीं दिया था लेकिन 2013 से यह बत trending बन चुका है और अब तो facebook पर किसी की पोस्ट  मे बहुत  सारे hashtag # नज़र आते है तो acutally  social media पर किसी शब्द  के आगे # लगा दिया जाये तो वह उस word को redirect करता है यानी वह श जिसके आगे अपने # यह चिन्ह  लगाया वह एक लिंक मे  बदल जाता है जो कोई भी उस hashtag पर क्लिक करे तो उससे मिलते जुलते लिंक दिखाई देगे /



Boost Post:- बूस्ट की गई पोस्ट बनाना

शुरुआत करने से पहले

  • आपको Facebook पेज की ज़रूरत होगी.
  • सुनिश्चित करें कि आपके पास ऐसी पेज भूमिका हो जिससे आप विज्ञापन चला सकें.

बूस्ट की गई पोस्ट बनाना

बूस्ट की गई पोस्ट बनाने के लिए:

  1. अपने Facebook पेज पर जाएँ.
  2. वह पोस्ट ढूँढें, जिसे आप बूस्ट करना चाहते हैं. इसमें नौकरियाँ, ईवेंट या वीडियो पोस्ट शामिल हो सकती हैं.
  3. पोस्ट को बूस्ट करें विकल्प चुनें. आपको यह अपनी पोस्ट के सबसे नीचे दाएँ कोने में मिल सकता है. नोट: अगर आप पोस्ट को बूस्ट करें विकल्प नहीं चुन पा रहे हैं, तो हो सकता है कि इस पोस्ट के लिए बूस्ट करने की सुविधा उपलब्ध नहीं हो.
  4. अपने विज्ञापन के लिए विवरण भरें. हम आपकी पोस्ट से चित्र और पाठ का उपयोग अपने आप कर लेंगे, लेकिन आप निम्न विवरण चुन सकते हैं:
    • ऑडियंस: सुझाई गई ऑडियंस चुनें या विशिष्ट लक्षणों के आधार पर नई ऑडियंस बनाएँ. नोट: अगर आपका विज्ञापन किसी विशेष विज्ञापन श्रेणी का हिस्सा है, तो आपके ऑडियंस विकल्प सीमित हो सकते हैं.
    • कुल बजट: सुझाए गए बजट का चयन करें या कस्टम बजट प्रदान करें.
    • अवधि: सुझाई गई समय सीमा में से किसी एक का चयन करें या कोई विशिष्ट समाप्ति तिथि दें.
    • भुगतान विधि: अपनी भुगतान विधि की समीक्षा करें. ज़रूरत पड़ने पर आप अपनी भुगतान विधि बदल सकते हैं या उसे अपडेट कर सकते हैं.
  5. जब आप यह काम पूरा कर लें, तो बूस्ट करें का चयन करें.

Facebook/Instagram Advertising using Facebook Ads Manager:- Facebook Campaign क्या है?

Facebook में advertise करने के लिए use होने वाले procedure की एक इकाई को campaign कहते हैं.

आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि मान लीजिये आपकी company ने कोई नया product launch किया है जिसकी promotion की responsiblity आपको दी गयी है. तो ऐसे में, यदि आप Facebook पर advertise करना चाहते हैं तो आप एक ad campaign create करेंगे और ये define करेंगे कि आपको ये promotion कितने दिनों तक करनी है.

इस advertisement process को जब हम, limited period of time में करते हैं, तो उसे एक ad campaign का नाम दिया जाता है.

Facebook ने advertisers के लिए एक बहुत ही बढ़िया और user-friendly Ads Manager platform create किया है जिससे कि कोई beginner भी बड़ी ही ज्यादा आसानी से ads को create करके publish कर सकता है.

तो ये मान के ही चल रहा हूँ कि आप इस Digital Marketing या कह लीजिये Online Advertising field में नयें हैं और Facebook में ads कैसे create करें जानना चाहते हैं. तो चलिए शुरू करते हैं.

Facebook में Ad Campaign Create करने की Step By Step Guide

सबसे पहले आपको अपने Facebook account में Login कर लेना है. फिर आपको अपने account के dropdown menu में जाना है. वहां आपको काफी options मिलते हैं, जिसमे Create Ads और Manage Ads का option भी शामिल होता है. कोई भी नया ad campaign create करने के लिए, Create Ads के option पर click करें.

यदि आपने इस option पर first time click किया होगा तो ये आपको brief intro देगा और आपको नया Facebook Ads account create करने के लिए कहेगा. आपको बस account को कोई भी नाम देकर, create के button पर click करके, अपना account create कर लेना है. हर एक step में Facebook का interactive और dynamic interface आपको पूरा guide करेगा.

आपको Facebook ads के interface में हर एक option के बगल में “i” का symbol दिखेगा. आप इस पर अपना mouse को hover करके, उस option के बारे में जान सकते हैं. तो basically ये एक helpful guiding option है.

इसके बाद, आपके सामने Facebook Ads Creation का Main page open हो जायेगा, जिसमे आपके सामने बहुत सारे प्रकार के Ad Campaign Types होंगे. आपको इनमे से अपने हिसाब से कोई भी ad campaign type चुनना है.

अलग-अलग types आपको अलग-अलग प्रकार की promotions में मदद करेगा. यदि आपको बस अपने brand का नाम popular करवाना है तो आप Brand Awareness को चुन सकते हैं, यदि आपको अपनी website पर traffic चाहिए तो आप Traffic को चुन सकते हैं, यदि आपको Conversions करवानी हैं, तो आप Conversions या फिर Catalog Sales वाला option चुन सकते हैं. इस प्रकार अन्य बहुत सारी considerations given होती हैं, जिनमे से आप कोई भी चुन सकते हैं, ये totally depend करता है कि आपकी requirement क्या है.

Facebook के किसी भी ad campaign को create करने के लिए 4 Major Phases होते हैं:

  1. Marketing Objective को चुनना
  2. Ad Set को Create करना
  3. Ad को Create करना
  4. Review के लिए Submit करना

किसी भी प्रकार के Facebook ad campaign ये चार steps तो होते ही होते हैं. हर एक step में further बहुत सारे options होते हैं. अब ये options vary करते हैं, अलग-अकग marketing objectives और consideration के हिसाब से जोकि आप सबसे पहले step में चुनते हैं.

अब हर एक option को तो इस article में explain नहीं किया जा सकता, क्योंकिं सभी marketing objectives के options का count तो बहुत ज्यादा हो जायेगा. इस लिए इस article में मैंने आपको हर एक phase का एक brief introduction दिया है जिससे कि आप खुद ad campaign को create और को configure करने योग्य बन पायें.

Marketing Objective को चुनना

जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया, जब आप Create Ads वाले section में account create कर लेंगे, तो दुबारा जब भी आप इस section में आयेंगे तो ये सबसे पहले step होगा और आपको इसमें अपने marketing objectives को चुनना होगा जैसे कि Brand Awareness, Lead Generation, Conversions आदि.

अभी तक Facebook में उपलब्ध सभी Marketing Objectives का screenshot नीचे दिया गया है:

FB Ads

Ad Set को Create करना

Ad Set में हमें basically हम ad campaign की limits, audience, interests, budget और placements आदि define करते हैं. सबसे पहले आपको Ad Set को कोई भी नाम दे देना है और फिर उसमे audience का चुनाव करना है. इसमें audience का चुनाव location के हिसाब से होता है कि आप किस जगह के घेरे में अपनी ad को दिखाना चाहते हैं. जैसे कि Janakpuri, Delhi. या फिर पूरा देश, पूरा कोई शहर आदि.

ऐसे ही आपको interest set करने होते हैं कि Facebook आपकी ad को केवल उन लोगों को दिखाये जोकि आपके द्वारा define की गयी चीज़ों में interested हों.

आप जिस भी हिसाब से audience और interest को चुनेंगे, Facebook आपको साथ के साथ calculate करके ये भी बता देगा कि आप कम से कम और ज्यादा से ज्यादा कितने लोगों तक अपनी ad को पहुंचा सकते हैं. Basically ये आपको estimated results बताता है.

इसके बाद, आपको define करना होता है कि Facebook आपकी ads को कहाँ-कहाँ दिखाए, जैसे कि Instagram, Facebook Desktop Version, Mobile Version आदि पर.

FB ADS 1

मैं आपको recommend करूँगा कि यदि आप एक beginner हैं तो आप इसे Automatic Placements पर ही रहने दे. इस option से Facebook खुद आपके लिए ads को अलग-अलग locations पर दिखायेगा.

इसके बाद आपको अपना budget set करना होता है कि आप इस particular ad campaign पर कितना ऐसा खर्चना चाहते हैं. यदि आप किसी दो या दो से ज्यादा दिनों के बीच में ad run कर्नेगे तो आपको अपना daily budget भर देना है और आप इसे weekly basis पर भी set कर सकते हैं.

Ad को Create करना

इस option में आपको ad को actually create करना होता है. आप ad के लिए या तो एक new ad create कर सकते हैं या फिर अपने किसी Facebook page के किसी post को ad के रूप में चुन सकते हैं.

आपको हर एक ad type के साथ किसी न किसी Facebook page को link करना ही होता है क्योंकि Facebook आपकी ads को आपके Facebook Page के behalf पर ही दिखता है. यानि कि आपकी हर एक ad में आपके Facebook के link किये गए page का ही नाम होगा.

FB Ads 2

इसके बाद आपको Ad का format चुनना है और उस format के हिसाब से images और videos आदि upload करके, ad को complete बनाना है. Facebook आपको बहुत सारे ad format options देता है जैसे कि Full-ScreenExperience, Carousel, Multiple Images, Single Image, Single Video, Combination of All Formats type etc.

इसके बाद आपको Call To Action button या proper links वगेरा ad कर देने हैं, ये options totally आपके marketing objectives के हिसाब से depend करते हैं और अलग-अलग होते हैं. हर एक option के आगे, further advanced options होते हैं जिससे कि आप अपने ad campaign को highly customize तरीके से run कर सकते हैं.

Review के लिए Submit करना

जब आप AdSet और Ad दोनों completely create कर लेते हैं, तो आपको अपनी ad को Facebook के review phase के लिए submit कर देना है. फिर आपको Approval का wait करना होगा. कई बार approval कुछ ही minutes में मिल जाता है और कई बार कुछ घंटो का समय भी लग जाता है.

एक बार जब आपको Approval मिल जाता है तो आपकी ad schedule के हिसाब से run होती है और उसके complete होने पर आपको results आपके Ads Manager में दीखते हैं. आप Results को Excel या CSV format में Ads Manager से export कर सकते हैं.

मैंने अपने Ad account से अलग-अलग campaigns run किये हुए हैं, जिनका result आप नीचे देख सकते हैं.

FB Ads 3

जब आप अपना पहले Ad campaign create करते हैं तो ये last step से आपका जितना भी budget है उतने पैसे account में ad करने के लिए कहता है और account creation के समय ये आपने आपकी desired currency भी पूछता है.

जितने भी आपके campaign को run करने के लिए पैसे लगेंगे, उतने पैसे आपको पहले अपने account में add करने होते हैं. आप किसी भी समय पैसों को Payment Settings में जाकर add कर सकते हैं. Facebook आपको Card, Net Banking और PayTM payment options provide करता है.

LinkedIn Advertising:-

  • उसके बाद create ad पर क्लिक करेगे 
  • उसके बाद join now क्लिक करेगे और सारी जानकारी भरेगे और agree &join पर क्लिक करेगे 
  • सभी जानकारी भरने के बाद सेट ad क्लिक करे उसके बाद लांच ad क्लिक करे |

URL Builder:- 

“url Builder एक प्रकार का url shortner होता है URL निर्माता

अपने विज्ञापनों के यूआरएल के लिए कस्टम कैंपेन पैरामीटर जनरेट करना

आप ऐसे पैरामीटर (जैसे utm_source, utm_medium, और utm_campaign) को उस यूआरएल में जोड़ सकते हैं जो संदर्भ कैंपेन के रिपोर्टिंग डेटा को कैप्चर करते हैं. उदाहरण के लिए, नीचे दिए गए लिंक के ज़रिए आप एक खास कैंपेन के भाग के रूप में एक खास ईमेल न्यूज़लेटर से example.com पर आए ट्रैफ़िक की पहचान कर सकते हैं:

https://example.com?utm_source=news4&utm_medium=email&utm_campaign=spring-summer

Email Marketing क्या है ?

Email marketing का सीधा सा मतलब email का प्रयोग करके या email के जरिये अपने Products या Services की Marketing करना। यानि की उसे market में show करना  email marketing एक online/digital marketing है। 

Email marketing एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिये से हम अपने products , services  की जानकारी email के द्वारा लोगो तक पहुचाया जाता है।  Email marketing . digital marketing का एक रूप है। चलिए इसे एक example के जरिये से समझा जाए।

मन लेते है आप एक Hosting Company  है और आपके पास बहुत से customer के Emails address है। आप अपने customers को कोई नई offers, hosting बारे  नई  update  देना हो। या फिर आपके company में कुछ नई feature add हुई है। तो आप एक ही बार में बहुत से customer को इखट्टा ईमेल send करदेतें  है इसी को email marketing कहते है। जिससे की आपको कोई ज्यादा परेशानी का सामना न करते हुए एक ही click में सभी customer को आपके updates के बारे में पता चल जाता है और आपको email से traffic भी मिल जाती है । ठीक इसी तरह online shopping की company भी अपना  मार्केटिंग करती है। flipkart, snapdeal, amazon, ebay etc.

 Computersike.online को ही देख  लीजिये यानि हमारे वेबसाइट को देख लीजिये की हमने sidebar में Subscribe box डाल रखा है उसमे आपको email address भरना होता है।

Getting Started with Google Analytics in hindi by unitdiploma

Google Analytics       ,

Getting Started with Google Analytics, Understanding Dashboard – Audience | Advertising | Traffic Source | Content |   Conversions, Taking decisions based on Analytics Reporting, Defining Business Goals and Objectives, Tracking Social Media Traffic, Tracking SEO Traffic, Integrating your Google AdWords campaigns into Google Analytics, Measuring Tools and Methods, Measuring your Site’s ROI, Introduction to Goal Conversion – Tracking the Conversions, Configuring UTMs (Custom URLs), Google Tag Manager – a brief overview. 

Google AdWords क्या है:

Google AdWords वह एक विज्ञापन देने की  सर्विस है, जिसमे कोई भी व्यक्ति अपने बिज़नस का विज्ञापन दे सकता है जिसकी सहायता से आसानी से और तेजी से अपने बिजनेश के लिए विज्ञापन बना तथा चला सकते हैं। इसके द्वारा आपके विज्ञापन गूगल पर चलाए जाते है और गूगल के विज्ञापन आपकी साइट पर दिखाए  जाते हैं। इसमे बजट से कोई लेना देना नही होता है

Google adwords ads step:-

  1. सर्वप्रथम https://ads.google.com/ वेबसाइट को open करेगे और साइन इन करे  button पर क्लिक करेगे 

Email id और password लिख कर आगे के option क्लिक करे 

Google ads नया खाता क्लिक करे 

नया कैंपेन create करेगे और किस टोपिक ads दिखाना है उसको select करके अगला option क्लिक करेगे 

सही खरीदारों तक पहुंचने वाला विज्ञापन बनाने के लिए इस जानकारी का उपयोग किया जाएगा

व्यवसाय का नाम

8 / 120

व्यवसाय की वेबसाइट

Ads की लोकेशन कहा कहा दिखाना है उसकी जानकारी लिख कर अगला option पर क्लिक करेगे 

उसके बाद keyword को select करके add कर nest button पर क्लिक करते है 

उसके बाद title और description को add करना 

Ads को कितने rupees मे public करना है उसे सिलैक्ट करे

Ads को सफलता पूर्वा create किया गया

परमिशन मिलने के बाद ads show होने लगेगे 

Setting up Google AdWords Campaigns

  1. Sign in to your Google Ads account.
  2. From the page menu on the left, click Campaigns.
  3. Click the plus button https://lh3.googleusercontent.com/zjCFMiHMS1mJU1kQMacxD3z0-4nP4DFKA2CcQI-L95QC78olo3QXh2qoIBOdAPi3Q8_t=w24-h24, then select New campaign. 
  4. Select one or more goals for your campaign, or if none of the goals fit what you’re looking for, select Create a campaign without a goal’s guidance.
    1. If this step doesn’t reflect what you’re seeing in your account, select a campaign type first then select a goal. Learn more about goals in the new Google Ads experience.
  5. Select a campaign type. 
  6. Click Continue.
  7. Select your campaign settings. Learn about each setting.
  8. Click Save and continue.

Adwords के द्वारा campaign चला कर आप users को अपनी business ad दिखा सकते है.

 Adwords Ads में कौन कौन से Campaign types है.

SEARCH ADS

यह Ads google Search engine में दिखाई देते है. यहाँ आपको cost per click गूगल को pay करना पड़ता है.

आपको keyword चुनना पड़ता है और जब वो keyword google में search करेगा तब Ads की मदत से आप visitors अपने Website पर ला सकते है.

आप अपना  business phone number दे सकते है ,आपको पैसे तभी चार्ज होंगे जब विजिटर आपको call करता है या आपके  website पर  visit करता है.

Search Ads

उपर दी गयी image में ‘Ad’ लिख कर है वो adwords द्वारा दिखाई जाने वाली ads है और organic results ads के बाद show होते है.

निचे दी गई image में आपको Call का परियाय दिख रहा होगा.

यह परियाय अगर advertiser ने phone no. दिया हो तो अपने मोबाइल से सर्च करने पर  Ad में show होता है.

With Call Search Ads

Google पर कोनसी Ad first position पर दिखेगी कोनसी उसके नीचे इसके लिए ranking system है. इसमें keywords, bid,landing page quality, etc देखा जाता है.

इन Campians में  Standard Campaign के अलावा Special Campaign का इस्तेमाल आप कर सकते है.

जैसे की Dynamic ads, Call to business ads, Mobile app promotion ads.

आइए जानते है Campaign के Special Campaign features को.

  1. Dynamic ads-  यह adwords का  बोहत बेहतरीन फीचर है. मान लिजिए आपकी Company, ‘Hotel online book’ करने की service देती है. अब किसी ने ‘Book hotel in goa’  google में  Search किया है, तो गूगल automatically  headline generate करेगा (तैयार करेगा) उसमे ‘Book hotel in goa’ इस keyword को दिखाया जायेगा और ad पर क्लिक करने पर विजिटर को goa के होटेल्स आपकी site के जिस page पर है, वो page दिखाया जायेगा. पर इसके लिए आपके site पर goa होटेल्स का page होना जरुरी है तभी गूगल यह result दिखाएगा.
  2. Call Only Ads- इस ads campaign में visitors ad क्लिक करते ही विजिटर landing page पर जाने की बजाए business को call लगता है. यह campaign किसी ambulance service ने रन किया है तो call लगेगा क्यों के ये site पर जा कर book करने से अच्छा है.
  3. Mobile App Promotion- इस में आप अपने Mobile App को promote कर के downloads बाढा सकते है, Search, Display या YouTube network पर.

उपर दिए special campaign में Call Only Ads सिर्फ Search Ads में उपलब्ध है.

बाकि special campaign, Search, Display तथा Video Ads network पर चलाये जा सकते है.

DISPLAY ADS

Display Ads Millions websites और काफी सारे mobile apps में इस्तेमाल हो रहे है.इस से आप अपने  business को अच्छी तरह promote कर सकते है और नए customer पा सकते है.

आपने आम तौर पर किसी website पर ads banner, text ads देखेंगे होंगे content के बिचमें या sidebar,etc में उन्हें Display Ads कहा जाता है.

Display Ads

जो लोग अपने website पर Adsense का इस्तेमाल करते है. उनके websites पर advertisers के ads adwords द्वारा दिखाए जाते है.

Dislpay Ads मोबाइल App में भी दिखाए जा सकते है.

आप कोई specific( वशिष्ट) mobile app पर भी अपनी business ad दे सकते है.

इसके अलावा display ads Gmail पर भी दिखाए जा सकते  है.

यह ads में आप keywords चुनते हो उससे related websites पर ads दिखाया जाता है. जैसे की कोई कंपनी fairness cream का advertise करना चाहती है.

तो उस cream का ad किसी beauty tips वाले ब्लॉग पर दिखेगा.

या आप पुराने visitors को ad दिखाना चाहते है तो वो भी कर सकते है.

या user के search history की मदत से भी display ads दिखाए जा सकते है. ये निर्भर करता है आप पर.

VIDEO ADS

Video ads की खास बात है की आपको पैसे तभी pay करने होंगे जब users आपका की पूरी ad देखेंगे.

मतलब आपके bussiness में जो interested(रूचि) नहीं है उसके लिए आपको पैसे pay नहीं करने होंगे.

YouTube पर video शुरू होने से पहले आपने advertise देखि होगी.

उसे adwords द्वारा दिखाए जनि वाली video ad कहते है.

Adwords video ads

video ads YouTube के साथ साथ गूगल partner sites पर भी दिखाए जा सकते है.  और display network जैसे की Apps में वगेरा.

Video ads के भी types है जैसे की Stream Ads, discovery ads, bumper ads

  1. Stream Ads- इस ad में विडिओ 5 sec दिखाने के बाद Skip का परियाय रहता है. Video 30 sec का पूरा देखने पर या advertiser को pay करना होता है वरना नहीं. 30 sec से पहले video में दी गई links पर क्लिक करने पर भी पैसे देने होंगे.
  2. Discovery Ads- इस ad फॉर्मेट में सिर्फ thumbnail दिखाया जाता है. कोई thumbnail पर click करता है तब पैसे charged होते है. यह ads Youtube search page,होम पेज,youtube पर related videos के साथ दिखाया जाता है.
  3. Bumper Ads- इस ad फॉर्मेट में विडियो skip करने का परियाय नहीं रहता. यह एक शोर्ट video होता है जिसे brand awareness के लिए इस्तेमाल कर सकते है. यहाँ  cost per impressions (CPM) होता है, पैसे आपको तभी pay करने है जब 1000 impressions आपके ad को मिलेंगे यानि जब हज़ार लोग देखेंगे.

SHOPPING ADS

Shopping ads retailers के लिए बेहद अच्छा परियाय है.

यह आपके product site पर ट्रैफिक लेन का बढ़िया तरीका है. और product buy करने के भी ज्यादा सम्भावना होती है.

क्यों के यहाँ text के साथ साथ product की pic,price, store का नाम,etc. दिखाया जाता है. निचे की पिक देखे shopping ads इस प्रकार होती है.

Shopping Ads example

यह ads आपके product के लिए चलानी है, तो पहले Google Merchant Center में आपको account बनाना पडेगा फिर adwords के साथ account लिंक करना पड़ेगा.

UNIVERSAL APP CAMPAIGN

यहाँ Mobile App सभी  जगह promote किया जाता है.

जैसे के Search result, playstore, display network, youtube. App के लिए ज्यादा Installs बढाने का universal app campaign बढ़िया तारिका है.

Universal App campaign by adwords

यह google adwords ne campaign type दिए है. जिस में आप app install होने पर पैसे pay करोगे.

या फिर app install होने पर कोई app में action होने पर.

  1. Google Analytics :- Google Analytics एक freemium web analytics है जिसका service Google के द्वारा provide किया जाता है| Freemium का मतलब की Free और premium दोनों service provide करता है| Analytics का काम Website के data को ट्रैक करना होता है जैसे traffic कितना आ रहा है, Traffic किस location से आ रहा है, traffic किस device से आ रहा है इत्यादि|      

इसके द्वारा हम अपने blog या website पर live visitors की संख्या भी देख सकते हैं और visitors कौन से page को देख रहे हैं और visitors किस location से visit कर रहे हैं इत्यादि हम देख सकते हैं| इस टूल के द्वारा live visitors देखने के लिए सबसे पहले इसका code आपको अपने blog में add करना होता है उसके बाद ही इसमें आपको आपके blog का रिपोर्ट show होगा| 

Google Analytics account कैसे create करें – Blog URL को Analytics में कैसे add करें?

यदि आप भी अपने blog के visitors को live देखना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको Analytics पर account create करना होगा उसके बाद आपको एक code दिया जायेगा जिसे अपने blog के theme में add करना होगा| जब आप code को theme में add कर देंगे तो आपको Google analytics पर live visitors दिखने लगेंगे| इसमें account बनाने के लिए आपके पास Gmail account होना चाहिए क्योंकि यह Google का service है और Google का service होने के कारण यह Gmail account से login होता है|

Step 1: Analytics account create करने के लिए सबसे पहले आपको Analytics के official website पर जाना होगा| (Click here for go to Official Website)

Step 2: अब यदि आपका Gmail account login नहीं होगा तो सबसे पहले Gmail account से login करने का option आएगा जिसमें अपना Gmail और उसके बाद Gmail का password enter करके login करें|

Step 3: अब login होने के बाद निचे दिए गए image की तरह option show होंगे जिसमें Sign Up पर click करें|

Sign up for Analytics

Sign up for Analytics

Step 4: अब आपके सामने एक sign up form open होगा जिसमें आपको आपको कुछ information fill up करने होंगे| Information fill-up करने से पहले आपको सबसे ऊपर में दो options show होंगे जैसे Website और Mobile app. यदि आप अपने blog के लिए Google analytics account create कर रहे हैं तो आपको Website वाला option select करना होगा| चलिए देखते हैं क्या क्या information चाहिए|

Creating New Analytics account

Creating New Analytics account

  1. Account Name: – इसमें आपको अपना Company का नाम या आपको अपना नाम enter करना होगा|
  2. Website Name: – इसमें आपको अपना website का नाम enter करना होगा जैसे मेरा blog का नाम Gupta Tree Point है तो मैंने Gupta Tree Point लिखा है|
  3. Website URL: Website URL enter करने से पहले आपको http:// या https:// select करना होगा यदि आपके blog में https add है तो https select करें और उसके बाद box में website का URL enter करें| एक बात कर ध्यान रखें की website URL में http या https add नहीं होना चाहिए मतलब की आपको website URL box में इस प्रकार URL enter करना होगा| www.computersike.online
  4. Industry Category: – आपका blog या website जिस category में बना है उस category को select करें यदि आपके blog का category इस list में शामिल नहीं है तो आप other category select कर सकते हैं|
  5. Reporting Time Zone: – आप अपना country का नाम select करें| आप जैसे ही country का नाम select करेंगे तो उसके सामने आपके country का time zone show होने लगेगा और यदि आपके country name select करने के बाद भी आपका time zone आपके country के हिसाब से नहीं show हो रहा है तो फिर time zone अपने अनुसार select करें|
  6. Data Sharing Setting: – इस category के अन्दर जितने भी checkbox हैं सबको tick ही रहने दें और यदि कोई tick नहीं है तो उसे tick करें|

Step 5: अब सारे details को enter करने के बाद सबसे निचे Get Tracking ID पर click करें|

Step 6: अब एक popup box show होगा जिसमे आपको Analytics का agreement accept करना होगा मतलब की उसका नियम का पालन करना होगा| इसमें आपको सबसे ऊपर में अपना country name select करना होगा उसके बाद आपको निचे में दो checkbox show होंगे जिसे tick करना होगा और सबसे अंत में I Agree के button पर click करना होगा|

Accept Agreement

Step 7: अब आपको एक tracking code show होगा जिसे copy करना होगा और फिर उसको अपने blog theme में add करना होगा|

Accept Agreement

Tracking ID

Tracking ID

WordPress blog में Analytics code को कैसे add करें?

अगर आपका blog WordPress platform पर चल रहा है तो आपको अपने blog के header.php में <head> tag के निचे code को add करना होगा तो चलिए step by step देखते हैं|

Step 1: सबसे पहले आप अपने username और password के द्वारा WordPress dashboard में login हो जाएँ|

Step 2: Login होने के बाद dashboard के left side में Appearance tab पर click करें और उसके बाद Editor tab पर click करें|

Appearance and Editor

Appearance and Editor

Step 3: अब उसके बाद right side में header.php के option पर click करें| अब एक नया page open होगा जिसमें <head> tag के just निचे analytics code को paste करें और फिर सबसे निचे Update File पर click करें|

Header.php File

Header.php File

अब आपका WordPress blog के theme में analytics code add हो चूका है| अब आप analytics open करके live visitors को देख सकते हैं|

Blogger blog में Analytics code कैसे add करें?

Step 1: सबसे पहले आप अपने Blogger dashboard में username और password के द्वारा login करें| Login करने के लिए आपको Gmail और password की आवश्यकता पड़ेगी|

Step 2: अब उसके बाद dashboard के left side में Theme और उसके बाद Edit HTML पर click करें|

Theme and Edit HTML

Theme and Edit HTML

Step 3: अब एक code box open होगा जिसमें <head> tag के just निचे analytics code को add करें और फिर सबसे ऊपर में Save Theme पर click करें|

Paste code below Head tag

Paste code below Head tag

अब आपके blogger blog के theme में analytics code add हो चूका है अब आप Google analytics को open

करके आप अपने blog पर live visitors को देख सकते हैं|

Google Analytics Home:

Home पर पूरे analytics process का पूरा एक summary दिखता है जिसमे Real time visitor, Conversion, revenue, User retention, session और बहुत कुछ जो भी analytics manager द्वारा set किया जाता है.

google analytics home

Customizations:

Customizations के मुख्य 4 हिस्से होते है.

Dashboards – यहाँ से User अपने हिसाब से dashboard बना सकता है जिसमे user, रेकुइरेमेंट के हिसाब से कोई भी Chart, table, matrices add या remove कर सकता है.

GA custom dashboard

Custom reports – User need के हिसाब से किसी भी matrices, dimensions add करके custom report बना सकता है.

custom report

Save reports – यहाँ पर कोई भी custom report या standard report बनाया जा सकता है इसको Admin section से manage कर सकते है.

Custom alerts – Traffic, converion, medium या किसी भी प्रकार के metric or dimension के लिए alert बना सकते है और इसमें less than, greater than, % Increase/decrease conditions लगा सकते है इससे जब भी set किये use metric या dimension से performance ऊपर या नीच होगा तो इसके बारे में जानकारी मिल जायेगा.

custom alerts

Real-Time:

इसके मुख्य 6 sub-part होते है.

Overview – यहाँ पर real-time website visitor, Pageview (Per minute, Per second), Top active pages, Top referrals, top keywords के बारे में जानकारी मिलता है.

real time traffic analysis

Locations – यहाँ से पता चलता है की website पर real-time traffic किस देश से आ रहे है.

traffic location

Traffic sources – यहाँ से real-time traffic के sources के बारे में जानकारी मिलता है यानि किस माध्यम का use करके traffic website तक पहुचे है.

traffic source

Content- यहाँ से जानकारी मिलता है की कौन page पर visitor active है.

Events – यहाँ से जानकारी मिलता है की जो भी Traffic website पर है वह कौन से event action को perform किये है पिछले 30 minute के अन्दर.

Conversion – यहाँ से जानकारी मिलता है की जो भी goals set किया गया है उसमे से पिछले 30 minute कौन कम्पलीट हुआ हैं.

conversions

.

Getting Started with Google Analytics, Understanding Dashboard – Audience | Advertising | Traffic Source | Content |   Conversions, Taking decisions based on Analytics Reporting, Defining Business Goals and Objectives, Tracking Social Media Traffic, Tracking SEO Traffic

 Integrating your Google AdWords campaigns into Google Analytics:- Sign in to Google Analytics.

Note: You can also open Analytics from within your Google Ads account. Click the Tools & Settings icon , select Google Analytics, and then follow the rest of these instructions.

  1. Click Admin and navigate to the property you want to link.
  2. In the Property column, click Google Ads Linking.
  3. Click + New link group.
  4. Select the Google Ads accounts you want to link, then click Continue.

    If you have an Google Ads manager account, select that account to link it (and all of its child accounts).

    If you want to link only some managed accounts, expand the manager account, then select each of the managed Google Ads accounts that you want to link. Or, click All Linkable to select all of managed Google Ads accounts, and then deselect individual accounts.
  5. Enter a link group title.
  6. Turn linking ON for each view in the property in which you want Google Ads data.
  7. Optionally, select Enable Google Display Network Impression Reporting to also include that data in each view.
  8. If you’ve already enabled auto-tagging in your Google Ads accounts, or if you want to let the linking process automatically enable auto-tagging in your Google Ads accounts, skip to the next step.

    However, if you want to manually tag your Google Ads links, click Advanced settings > Leave my auto-tagging settings as they are.
  9. Click Link accounts.

Congratulations! Your accounts are now linked. If you opted to use auto-tagging (recommended), Analytics will start automatically associating your Google Ads data with customer clicks.

When you link an Google Ads account and an Analytics property, anyone with access to the view(s) you selected during linking will be able to see your imported Google Ads data. Likewise, if you choose to import Analytics data (goals/Ecommerce transactionsmetrics, or Remarketing lists) into your Google Ads account, anyone with access to that Google Ads account will be able to see your imported Analytics data.

Edit a link group

Once you’ve created a link group, you can add or remove Google Ads accounts and Analytics views from that link group. You can also rename the link group.

If you want to remove all of your Google Ads accounts from your link group, follow the instructions for unlinking (in the next section).

To edit a link group:

  1. Sign in to Google Analytics..
    Note: You can also open Analytics from within your Google Ads account. Click the Tools & Settings icon , select Google Analytics, and then follow the rest of these instructions.
  2. Click Admin and navigate to the property whose Google Ads linking you want to edit.
  3. In the Property column, click Google Ads Linking.
  4. In the table, click the link group that you want to edit.
  5. To add or remove Google Ads accounts from your link group, click Edit in the Select linked Google Ads accounts section, and check or uncheck the boxes next to those accounts.
  6. To add or remove Analytics views, click Edit in the Link configuration section. Turn linking on or off as necessary.
  7. Click Save.

Unlink Google Ads and Analytics

If you want to unlink all of the Google Ads accounts in a link group from your Analytics property, you need to delete the entire link group.

If you have multiple Google Ads accounts in a link group and want to unlink only some of your accounts from your Analytics property, follow the Edit a link group instructions in the previous section.

To delete an entire link group:

  1. Sign in to Google Analytics..
    Note: You can also open Analytics from within your Google Ads account. Click the Tools & Settings icon , select Google Analytics, and then follow the rest of these instructions.
  2. Click Admin and navigate to the property you want to unlink.
  3. In the Property column, click Google Ads Linking.
  4. In the table, click the link group that you want to delete.
  5. Click Delete link group.
  6. In the confirmation pop-up, click Delete.

Keep in mind, if you delete a link group, all data will stop flowing between your Google Ads and Analytics accounts:

  • Google Ads data (such as clicks, impressions, CPC, etc.) will no longer be visible in Analytics reports. Session data up until the time you unlink the account will still be available. Any new sessions that result from clicks in these linked Google Ads accounts after you have unlinked will appear in Analytics reports as (not set).
  • Your Analytics Remarketing Lists will stop accumulating new users.
  • Google Ads will stop importing all Analytics Goals, Ecommerce transactions, and metrics you configured.

Note: Once Analytics data (for example, Goals) has been imported to Google Ads, it is subject to the Google Ads terms of service.

Defining Digital Marketing in hindi by unitdiploma

Digital marketing:- डिजिटल मार्केटिंग का प्रयोग प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए की जाती है जिससे बहुत ही कम समय मे कंपनी अपने टारगेट ग्राहको के निकट पहुचा सकते है यदि हम पिछले कुछ वर्षो की बात करे तो हम ये पायेगे की विज्ञापनो का स्वरूप  काफी बादल गया है  

Digital marketing objectives:-

डिजिटल मार्केटिंग के objective निम्नलिखित प्रकार के होते है

  • Increase sales:- डिजिटल मार्केटिंग का उद्देश्य sales को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है
  • Improve conversion rate:- Improve conversion rateसे हम गूगल एनालिटिक्स का प्रयोग  डिजिटल मार्केटिंग करते है ,इसमे  compaings,keyword,loading page का प्रयोग करते है
  • Percentage of return visitors
  • Organic traffic volumes:- organic traffic का मतलब है कि चैनल या वेबसीटेस पर व्यक्ति सर्च करके आ रहे है/  वेबसीटेस या चैनल  को  share करके या ads दिखा के traffic नहीं लाया जा रहा है
  • Reduce bounce rate:- Reduce bounce rate: का प्रयोग करके हम visitor या व्यक्ति को चैनल या वेबसीटेस पर अधिक समय तक रोकने के लिए प्रयोग करते है

Search engine optimization(seo) :- यह एक ऐसी तकनीक है जिससे हम अपने वेबपजे को सर्च मे टॉप (top) मे लाते है सर्च इंजिन optimization मे keyword type के जरिये no 1 position पर लाते है 

जैसे keyword,metadata,etc| 

Search engine marketing google adwords:- Search engine marketing google adwords के साथ हम अपने वेबसाइट  या पोस्ट को प्रथम स्थान पर लाते है

Search engine marketing free marketing और paid marketing भी होता है इससे हम अपने पजे को सर्च इंजिन मे top पर करते है,गूगल अड्वोर्ड्स को गूगल कंपनी ने ads मार्केट  करने के लिए बनाया गया है  

SEM-Search-engine-marketing.jpg

Search Engine में Ads Show होने वाले Results को ही SEM कहते है 

google adwords के  कुछ Ads है ।

1.PPC- Pay Per Click
2.PPC- Pay Per Call
4.CPC- Cost Per Click
5. CPM (cost-per-thousand impressions)
6.Paid Search Advertising

Social Media Marketing:- Social Media Marketing, social sites पर हम अपनी blog, Brand या product को promote करने के लिए जो भी strategy apply करते है उसे social media marketing कहते है,

smm.jpg

Social Media Marketing एक Internet Marketing का एक form है जहाँ हम ऐसे हजारों content create और share करते ह Social Media पर के वल अपने या किसी दुसरे company के Marketing और Branding Goals को achieve करने के लिए . इस social media marketing म ऐसे कई activities शामिल है जैसे की text और image updates को post करना, videos को post करना और ऐसे ही अलग content जिससे की audience engage हों. ये companies को एक रास्ता बनाकर के देती है की कैसे आप अपने नए customers और पुराने के साथ engage रहे |

  • Facebook:- Facebook World की सबसे popular social network site है Facebook. जहा पर anytime आपको million users active मिलेंगे. और अगर आप शिर्फ़ India जो कि second largest online market हे यहा पर भी आपको monthly 241 million + active users मिलेंगे.

और Facebook पर marketing के लिए आपकोFacebook Tips & Tricks के बारे में जानना होगा. और अपनी Brand की एक page create करना होगा फिर आप इसपर free और paid जैसे भी अपनी blog या product की promotion कर सकते हो,और Advertising on Facebook के जरिये आप लाखो visitors या Customers Recived कर सकते हो.

facebook.jpg
  • LinkedIn :- LikedIn भी एक professional network site है. और इसपर आपको शिर्फ़ professional लोग ही ज्यादा मिलेंगे. तो इस social media site पर भी आप अपनी content को promote करके अपनी business की Promotion कर सकते है.
LinkedIn.png
  • YouTube:- Digital marketing के लिए के लिए YouTube भी एक बहुत ही बढ़िया social media site है. इसपर आप अपनी blog को promote करने के लिए video create करे और videos पर अपनी products के बारे में बताए. जिसे आप बहुत से लोगो को attract कर सकते हो. और अपनी blog पर traffic भी increase कर सकते हो.
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social Media Marketing आपके Business में कैसे लाभ देता है ?

Social media marketing से आप अपने बहुत से Marketing लक्ष को पा सकते हैं जो की कुछ इस प्रकार हैं-

  1. जब आप social media पर रहते है तो इससे आपकी Website traffic बढ़ सकती है।
  2. इससे आप दूसरों के साथ बातचीत कर अपने relation को और मजबूत कर सकते हैं जिससे आपके ब्रांड को एक अलग पहेचन मिलता है।
  3. इससे आपकी Brand Awareness बढ़ सकती है और ज्यादा से ज्यादा लोग आपके बारे में जानेंगे जिसके द्वारा भी आपके business में लाभ होगा।
  4. आपकी एक अलग Brand identity बनेगी और आपके ब्रांड पर लोग भरोशा करने लगेंगे।
  5. इससे आप अपने Audience के साथ बेहतर interact कर सकते हैं जो की आपके Brand के value के लिए अच्छा है।

Display Advertising – Display Advertising का प्रयोग करके किसी  प्रोडक्ट का Image, Video, GIF किसी Online Platform पर Display करते हैं.उसे Display Advertising कहते है 

 display.pngExample : यदि कोई Advertiser हमारे Website पर Advertise करना चाहता है तो हम उसके Image / Video को Site के किसी पार्ट में अपने Readers को दिखायेंगे. Display Advertising सिर्फ Awareness के लिए किया जाता है.

Contextual advertisement:- Contextual advertisement वेबसाइट 

या अन्य मीडिया पर प्रदर्शित होने वाले विज्ञापनों के लिए लक्षित(Targeted) विज्ञापन का एक रूप है

जैसे किसी मीडिया या वैबसाइट पर व्यक्ति जो भी देखना या सर्च करना चाहता है उससे related ads दिखाये जाते है 

Behavioral advertisement :-Behavioral advertisement का प्रयोग किस प्रकार का page या post को लिखा गया है उस प्रकार का ads दिखाया जाता है 

Targeted advertisement :- Targeted advertisement किसी टारगेट व्यक्ति को advertisement दिखाने के लिए Targeted advertisement का प्रयोग किया जाता है यह advertisement कितने समय तथा कब तक सीमित रहेगा |

, Content Marketing & Blogging:- जसके मायम से Valuable content को बनाया जाता है और उसे share भी कया जाता है जससे क ये customers को अपनी और आकषत कर सके और उह repeated buyer म बदल सक. आप जो भी content share करते ह वो आपके उन चीज़ से काफ समानता रखता हो जो आप बेचते ह, या हम ये भी कह सकते ह क आप लोग को अछ जानकारी देते ह, उह शत करते ह ताक वो आपके वषय म जान सक, आपको पसंद कर सक और आपके ऊपर ववास कर सक जससे वो आपके साथ आगे business कर सके 

जैसे 1. Infographics. ये मुयतः लबे, verticla graphics होते ह जसम Statistics, charts, graphs और सरे जानकारी को लखा जाता है. इनम Images के साथ उनम सबंधत जानकरी भी दान क जाती है. आपके marketing के लए Infographics बत effective बन सकते ह अगर उह सही तरीके से बना जाये और उह सही तरीके से Share कया जाये. इन Infographics को आप खुद भी बना सकते ह या कसी सरे professional के द्वारा भी बना सकते ह.

2. Webpages. Normal Webpages और एक Content Marketing Webpages म काफ अंतर है. यूंक यद आप कसी Webpages को अछ तरीके से लख और उह सही तरीके से SEO optimized कर तब इससे आप बत से लोग को अपनी और आकषत कर सकते ह. यूंक ये आसानी से Rank हो जायेगा जो क आपके Brand के लए बत ही अछा है.

3. Podcasts. Content Marketing म Podcasts का भी काफ महव है. ये आपके Contents को लोग के सामने अछे तरीके से दशत करता है. जससे यादा से यादा लोग आपके वषय म जान सक. इससे आपके Brand क publicity भी हो जाती है.

4. Videos. कहते ह क Text क तुलना म Videos बत ही आकषक होते ह और इह आसानी से share भी कर सकते ह. Videos म customers आपके content के वषय म अछे तरीके से जानते ह और उसे देखते ह जससे उनम आपके content को लेकर ववास उपन होता है. इससे आपके Brand क value बढ़ जाती है जो क आपके Branding Value के लए बत महवपूण है 

5. Books या Text. Text एक बत ही महवपूण तरीका है content marketing के लए. यहाँ Marketers अछे content लखकर लोग को अपनी तरफ आकषत कर सकते ह. वैसे ही आप Books का इतमाल एक Marketing tool के हसाब से भी कर सकते ह. इससे आपका Branding Value भी बढ़ता है और लोग का आपके ऊपर ववास भी बढ़ जाता है.

Lead Generation : Lead Generation एक marketing term है जिसे  की  describe किया जाता है एक connection बनाया जाता है एक potential customer या client के साथ. ज्यादातर Online Advertising का मुख्य  लक्ष्य  होता है Leads generate करना, जो की बाद मे  एक company या organization के लए sales या subscriptions generate कर सके 

ऐसी leads generate  किया जाता है Internet म उसे Online lead generation कहा जाता है.  जाता है ads को run कर, जसके लए service जैसे क Google AdWords या Bing Ads या फर directly purchasing कया जाता है advertising space को सरे websites पर.

Advertisers चुन सकते ह run करना या तो CPC (cost per click) या CPA (cost per action) ads, जसम दोन ही leads generate करते ह. वैसे तो CPA और CPL (cost per lead) को असर इतमाल कया जाता है interchangeably, वह CPL specifically measure करता है lead generations, न क aggregate clicks या sales को

 Marketing Offer – Attractive / Relevant Offer

:- , Landing Page – Offer’s details with form, Conversion Page – Thank you page, Email Marketing, Video Marketing, Responsive Design, Google Analytics

E-Commerce Payment Payment Gateway, Modes of Electronic Payment, Threats & protections for ecommerce payment system

    E-Commerce Payment  E-Commerce Payment Payment Gateway, Modes of Electronic Payment, Threats & protections for ecommerce payment system

E-Commerce Payment :- E-Commerce मे खरीदे गए services(सर्विसेस) के लिए पेमेंट इंटरनेट के माध्यम से किया जाता है इलेक्ट्रॉनिक्स पेमेंट कहते है ,यह एक तरह का फाइनेशियल एक्सचेंज है जो बिक्रेता और खरीदार के बीच मे ऑनलाइन स्थापित किया जाता है/

“ऑनलाइन लेनदेन के लिए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान की स्वीकृति की सुविधा देती है। इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज (EDI) के एक उपसंपादक के रूप में भी जाना जाता है, इंटरनेट आधारित खरीदारी और बैंकिंग के व्यापक उपयोग के कारण ई-कॉमर्स भुगतान प्रणाली तेजी से लोकप्रिय हो गई है“

Payment Gateway: पेमेंट गेटवे एक ऐसी सर्विस है जिसके जरिये किसी भी E-Commerce Business में ग्राहक द्वारा ऑनलाइन स्टोर को क्रेडिट कार्ड या डेविड कार्ड से भुगतान किया जाता है| जिसमें ग्राहक द्वारा ऑनलाइन भेजा गया पैसा सीधे स्टोर मालिक के बैंक खाते में पहुँच जाता है,payment gateway एक सर्विस है जिसके जरिये पैसे को मैनेज किया जाता है विभिन्न प्रकार की कम्पनी पेमेंट गेटवे बनाया है 

जैसे :- ccavenue,paytm,paypal,payumoney,etc

Modes of Electronic Payment:-

  • क्रेडिट कार्ड (Credit Card):- क्रेडिट कार्ड का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट करने के लिए प्रयोग किया जाता है जब कोई कस्‍टमर क्रेडिट कार्ड के माध्यम से प्रॉडक्‍ट खरीदता है, तो क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता बैंक ग्राहक की तरफ से पेमेंट करता है और कस्‍टमर के पास एक निश्चित समय अवधि होती है जिसके बाद वह क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट कर सकता है।
  • डेबिट कार्ड (Debit card):- क्रेडिट कार्ड की तरह डेबिट कार्ड, एक छोटा प्लास्टिक कार्ड है जिसमें बैंक अकाउंट नंबर के साथ मैप किए गए युनिक नंबर होते हैं। बैंक से डेबिट कार्ड प्राप्त करने से पहले बैंक अकाउंट होना आवश्यक है, डेबिट कार्ड का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट करने के लिए प्रयोग किया जाता है ।
  • ई-वॉलेट (E Wallet):- ई-वॉलेट एक प्रीपेड अकाउंट है जो कस्‍टमर को एक सुरक्षित वातावरण में कई क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और बैंक अकाउंट नंबर स्टोर करने की अनुमति देता है।
  • नेटबैंकिंग (Net banking):- netbanking बैंक द्वारा एक id होता है जो उपभोकता को पेमेंट करने के लिए दिया जाता है यह id बैंक मे अकाउंट होने पर ही दिया जाता है अपनी नेट बैंकिंग आईडी और पिन डालना होता हैं यह कस्‍टमर के बैंक में पहले से मौजूद पैसे का पेमेंट करने के डेबिट कार्ड के समान मेथड का उपयोग करता है। नेट बैंकिंग के लिए यूजर को पेमेंट उद्देश्यों के लिए कार्ड रखने की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन यूजर को नेट बैंकिंग फीचर के लिए अपने बैंक के साथ रजिस्‍ट्रेशन करने की आवश्यकता होती है। खरीद को पूरा करते समय कस्‍टमर को सिर्फ अपनी नेट बैंकिंग आईडी और पिन डालना होता हैं।
  • ऑफलाइन (offline payment):- जो पेमेंट हम फ़िज़िकल(हाथ से हाथ ) रूप से पेमेंट करते है उसे ऑफलाइन पेमेंट कहते है /

 Threats & protections for ecommerce payment system (ई-कॉमर्स भुगतान प्रणाली के लिए खतरा और सुरक्षा) :-

Threats for ecommerce payment system:- विभिन्न प्रकार के ई कॉमर्स खतरे है कुछ आकस्मिक और कुछ मानसिक त्रुटि के कारण है डेटा का दुरुपयोग,धन की चोरी  ,हैकिंंग ,क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ि और असुरक्षित सेवाए है और भी ई कॉमर्स खतरे है

protections for ecommerce payment system:- ई कॉमर्स protections के लिए डिजिटल स्टीर्फ़िकेट (SSL)प्रमाणपत्र होना चाहिए जो विश्वसनीय  थर्ड पार्टी कंपनी द्वारा जारी किया जाता है

एन्क्रिप्शन:- यह एक सामान्य टेक्स्ट को एंकोडेड टेक्स्ट मे बदलने की प्रक्रिया है जिसे मैसेज भेजने  या प्राप्त करने व्यक्ति के अलावा कोई और नहीं पढ़ सकता है 

Electronics Commerce in Hindi by unitdiploma

Electronics Commerce
Electronics Commerce advantages and disadvantages
E-Commerce Business model B2B, B2C, C2C, E-Governance
Four C’s (Convergence, collaborative
computer content management and call center
Supply Chain Management
benefits (advantage) of Supply Chain Management
Electronics commerce advantages:-
Types of e commerce
Electronics Commerce in hindi

Electronics Commerce :- इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स इंटरनेट पर वस्तुओ और सेवाओ के खरीद या बिक्री की प्रक्रिया होता है इसमे जो काम हम ऑफलाइन करते है इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स मे वही कार्य ऑनलाइन इंटरनेट पर करते है ,इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स की शुरुवात 1960 ई  मे हुआ था ,इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स दो या दो से अधिक व्यक्तियों के डेटा या धन को इलेक्ट्रॉनिक्स रूप एक दूसरे से स्थानांतरित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स का प्रयोग किया जाता है इसे e-commerce भी कहते है/

  • Online shopping
  • Electronic payment
  • Internet banking
  • Online ticketing 

Online shopping:- जब वस्तुओ को  खरीद या बिक्री की प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक्स कॉमर्स से किया जाता है उसे ही ऑनलाइन शॉपिंग कहते है 

“जब कोई समान या वस्तुओ को इंटरनेट पर खरीद या बिक्री हो उसे ही ऑनलाइन शॉपिंग कहते है ”

जैसे :- Amazon,Flipkart,Snapdeal,etc

Electronic payment:- internet पर पेमेंट करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स पेमेंट का प्रयोग किया जाता है ,इलेक्ट्रॉनिक्स पेमेंट डिजिटल रूप से पेमेंट करने का एक माध्यम होता है इलेक्ट्रॉनिक्स पेमेंट कैश लेस पेमेंट होता है

“जब भी Online या Offline सामना खरीदे जाने के बाद ग्राहक Payment करता है जिससे ग्राहक के Account से रूपये विक्रेता के Account में Transfer हो जाते है लेकिन जब Payment में केवल आकड़ों या Digital Signal का ही Transfer होता है तो इस प्रकार किये गए Payment को Electronic Payment कहा जाता है.”

जैसे :- डेबिट कार्ड ,क्रेडिट कार्ड,एटीएम ,प्रीपेड कार्ड/

Internet banking:-  इंटरनेट बैंकिंग  के माध्यम से बैंक-ग्राहक  अपने कंप्यूटर द्वारा अपने बैंक नेटवर्क और वेबसाइट का प्रचालन कर सकते है। इस प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ है कि कोई भी व्यक्ति घर या कार्यालय या कहीं से भी से बैंक सुविधा का लाभ उठा सकता है। ऑनलाइन बैंकिंग इंटरनेट पर बैंकिंग संबंधी मिलनेवाली एक सुविधा है, जिसके माध्यम से कंप्यूटर का इस्तेमाल कर उपभोक्ता बैंकों के नेटवर्क्स और उसकी वेबसाइट पर अपनी पहुंच बना सकता है और घर बैठे ही खरीददारी, पैसे का स्थानांतरण के अलावा अन्य तमाम कार्यों और जानकारी के लिए बैंकों से मिलने वाली सुविधा का लाभ उठा सकता है

जैसे :-State Bank Of India, ICICI Bank, Punjab National Bank, Axis Bank ,Union Bank, HDFC Bank,Central Bank of India, Bank of Baroda,etc

Online ticketing :- ऑनलाइन टिककटिंग का प्रयोग कर  इंटरनेट पर ticket काटने के लिए किया जाता है/

जैसे :- ट्रेन की टिकट ऑफलाइन मिलता है लेकिन ऑनलाइन टिककेटिंग के जरिये हम घर बैठे ट्रेन टिकिट बूक कर सकते है 

Electronics commerce advantages:-

  • ई-कॉमर्स उपभोक्ताओं को सस्ते तथा क्वालिटी प्रोडक्ट्स को देखने का मौका देता है 
  • यह नेशनल तथा इंटरनेशनल दोनों मार्केट में बिजनेस एक्टिविटीज की डिमांड को बढाता है
  • इजी रिटर्न पॉलिसी
  • इसके माध्यम से छोटे एंटरप्राइजेज प्रोडक्ट्स की खरीददारी, बेचना तथा सर्विस के लिए ग्लोबल मार्केट में एक्सेस कर सकते है
  • प्रोडक्ट या कीमत की तुलना कर सकते हैं
  • पेमेंट आसानी से कर सकते हैं
  • ई-कॉमर्स, बिजनेस में या व्यक्तिगत रूप से 24×7 के रूप में मार्केट में एक्सेस करने की सुविधा को प्रदान करता है | इस तरह यह बिजनेस में sales तथा प्रॉफिट को बढ़ावा देता है |

Electronics commerce disadvantages:-

  • ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीदते समय कई चिजों के हैक होने का खतरा होता है
  • ऑनलाइन प्रोडक्ट खरीदते समय हम प्रोडक्ट को फिजिकलि नहीं देख सकते है
  • ऑनलाइन खरीदे प्रोडक्ट की डिलिवरी ऑफलाइन खरीदे प्रोडक्ट की तुलना लेट होता है
  • उपभोक्ताओ को यह समझने में असफलता होती है की वे ई-कॉमर्स के माध्यम से खरीददारी कैसे करे
  • कॉमर्स venture मुख्य रूप से third party पर निर्भर करता है | अर्थात हम बिना इन्टरनेट के ग्लोबल मार्केट में एक्सेस नही कर सकते है | इन्टरनेट third party के रूप में role को play करता है

Types of e commerce:- E commerce निम्नलिखित प्रकार होते है

  • Business to Business (B2B)
  • Business to consumer(B2C)
  • Consumer to Consumer(C2C)
  • Business to Government(B2G)
  • Business to Business (B2B):- एक व्यापारी से दूसरे व्यापारी के बीच लेनदेन करने के लिए Business to Business मोडेल का प्रयोग किया जाता है

 जैसे:-कोई कंपनी खुद कोई प्रोडक्ट नही बनाती है और किसी दूसरी कंपनी से खरीद कर फिर अपना समान बेचती है तो वो B2B के अंतर्गत आता है 

  • Business to consumer(B2C):-इस  ई कॉमर्स मे एक बिसिनेस और consumer  के बीच लेनदेन होता है ,बिजनेस मैन और seller के बीच को लेनदेन होता है

जैसे :- Flipkart and Amazon,etc

  • Consumer to Consumer(C2C):- यह दो Consumers यानी दो उपभोक्ताओं के बीच लेनदेन होता है । इसमे दो उपभोक्ताओं द्वारा आपस में कुछ खरीदा और बेचा जाता है। 

जैसे :- eBay, OLX

  • E Governance:-  इस प्रकार में कंपनियों या consumer(कोंसुमर) सार्वजनिक प्रशासन या सरकार के बीच ऑनलाइन किए गए सभी लेनदेन शामिल हैं। खासतौर पर वित्तीय, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार, कानूनी दस्तावेज और रजिस्ट्रार आदि 

जैसे:- GST

Four C’s (Convergence, collaborative, computer content management and call center)

  • Convergence
  • collaborative
  • computer content management 
  • call center
  • Convergence(साथ मिलकर काम करना ):- ई कॉमर्स मे कंवर्जेंस का प्रयोग अधिक लोग किसी कार्य को एक साथ मिलकर कैसे करते है,

उदाहरण के लिए: – इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक व्यापार, सेल फोन प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटरीकृत फिल्म गतिविधि, स्ट्रीमिंग संगीत और वीडियो उच्च परिभाषा टीवी (एचडीटीवी, 3 डी, 4 डी) वीडियो गेम फ्रेमवर्क

  • Collaborative( सहयोग ):- ई कॉमर्स मे दो या अधिक व्यक्तियों या बिजनेस का मिलकर काम करना ही सहयोग कहलाता है, सहयोग की प्रक्रिया में ज्ञान का बारंबार तथा सभी दिशाओं में आदान-प्रदान होता है/
  • computer content management(सामग्री प्रबन्धन प्रणाली):-ऐसा कम्प्यूटर अनुप्रयोग है जो भिन्न-भिन्न प्रकार के डिजिटल मिडिया इलेक्ट्रानिक टेक्स्ट का सृजन करने, सम्पादन करने, प्रबन्धन करने, खोजने एवं प्रकाशित करने के काम आता है। प्रबन्ध करने के योग्य सामग्री में कम्प्यूटर संचिकाएँ, छबियाँ (इमेजेज), ऑडियो संचिकाएँ, विडियो संचिकाएँ, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज तथा वेब-सामाग्री आदि हो सकती है। “वेब कन्टेन्ट मनेजमेन्ट”, “डिजिटल असेट मैनेजमेन्ट”, “डिजिटल रेकार्ड्स् मैनेजमेन्ट”, “इलेक्ट्रानिक कन्टेन्ट मैनेजमेन्ट” आदि इसके अन्य नाम हैं।
  • call center:- हम अपनी समस्या के समाधान के लिए कस्टमर केयर में कॉल करते है। कस्टमर केयर में कॉल करना मतलब Call Center में कॉल करना होता है। आज सभी कंपनियां अपने ग्राहकों को बेहतरीन कस्टमर सर्विस देना चाहती है। इसलिए वह Call Center की मदद लेते है।

Supply chain management:- Supply chain management मे प्रोडक्ट को मैनेज  किया जाता है,और स्टाक को मैनेज किया जाता है जिसमे सही प्रोडक्ट को सही समय मे उपभोक्ता को डिलीवर किया जाता है Supply chain management चैन की प्रक्रिया उत्पादक से थोक विक्रेता से फुटकर विक्रेता से ग्राहक तक प्रोडक्ट पहुचाने की प्रक्रिया है,इसे scm कहते है /

जैसे :- प्रोडक्ट की जानकारी ,प्रोडक्ट टाइटल ,आदि 

• supplier (आपूर्तिकर्ता):- एक supplier जो है वह raw material उपलब्ध कराता है जिससे कि
प्रोडक्ट का निर्माण किया जाता है.
supplier जो है वह vendor से पूरी तरह भिन्न होता है, supplier किसी कंपनी को raw materials सप्लाई करता है जबकि vendor प्रोडक्ट्स को customers को बेचता है.

• manufacturer (उत्पादक):- एक उत्पादक वह होता है जो आपूर्तिकर्ता से raw material प्राप्त
करता है तथा उससे प्रोडक्ट का निर्माण करता है.

• customer (ग्राहक):- ग्राहक वह होता है जो निर्मित हुए प्रोडक्ट को प्राप्त करता है तथा यह
सप्लाई chain का अंतिम लिंक होता है.

benefits (advantage) of Supply Chain Management:-

इसके निम्नलिखित लाभ है:-

1:- इसमें डेटा ट्रान्सफर ऑनलाइन होता है जिससे कागजी कार्यवाही नही करनी पडती है.

2:- इससे wholeseller तथा distributor संतुष्ट होते है क्योंकि प्रोडक्ट सही समय में सही व्यक्ति को प्राप्त होता है.

3:- इसमें गलतियों की सम्भावना बहुत कम होती है.

4:- यह बहुत सस्ता है.

5:- इसमें प्रोडक्ट की डिलीवरी की गति बहुत तेज होता  है.

6:- क्वालिटी बहुत ही अच्छी होती है.

7:- एक कुशल SCM क्वालिटी को बनाये रखता है तो वह कस्टमर को satisfy कर देता है.