UP Board Result 2022 Date: यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए बड़ा अपडेट

UP Board Result kab aayega Latest Update: छात्रों को इस वर्ष रिजल्‍ट वेबसाइट पर हेवी ट्रैफिक की समस्‍या का सामना नहीं करना पड़ेगा

UP Board 10th, 12th Result 2022 Date Update: उत्‍तर प्रदेश माध्‍यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) अब कुछ ही समय में यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं के रिजल्‍ट की घोषण…

उच्च-स्तरीय भाषा प्रोग्रामिंग (High-level language programming)

Highlevel Language Programming उच्चस्तरीय भाषाएँ, प्रोग्रामिंग 

भाषाएँ हैं जो गणितीय प्रतीकों, प्राकृतिक भाषा करेक्टर और प्रतीकों के संयोजन द्वारा निर्मित होती हैं तथा वास्तविक दुनिया के परिदृश्यों द्वारा भी

निर्मित हैसामान्य तरीके से आधुनिक प्रक्रिया उन्मुख प्रोग्रामिंग भाषाओं (modern procedureoriented programming languages) को उच्चस्तरीय भाषाओं के रूप में जाना जाता हैये मुख्य रूप से एक प्रोग्राम के तेऔर आसान विकास के लिए लाग किए जाते हैइस प्रोग्राम के विकास के लिए सीपीयू का आर्किटेक्चर और रजिस्टरों को याद करने की आवश्यकता नहीं हैकम्पाइलर का उपयोग उच्चस्तरीय भाषा प्रोग्राम को मशीन भाषा में ट्रांसलेट करने के लिए किया जाता हैCOBOL, FORTRAN, BASIC.C और C. Java आदि विभिन्न उच्च स्तरीय भाषाएँ हैं

Physical design of IoT in hindi

Physical Design of IoT in Hindi

IoT के physical design के अंतर्गत दो चीजें आती है जो कि निम्नलिखित हैं:-

  1. Things

  2. IoT Protocols

Things –

IoT में Things को IoT devices कहा जाता है और प्रत्येक device की एक unique identity (अलग पहचान) होती है. इन devices का कार्य remote sensing, actuating, और monitor करना आदि होता है.

IoT devices बहुत प्रकार की होती हैं जैसे कि – sense करने वाली डिवाइस, smart watch (स्मार्ट घडी), smart electronic appliances (स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरण), wearable sensors (पहनने योग्य सेंसर), automobiles, और industrial machine (औद्योगिक मशीन).

ये devices डाटा को जनरेट करती हैं और उसके बाद इस data को data analytics system के द्वारा उपयोगी information में बदल दिया जाता है.

उदाहरण के लिए – temperature को मापने वाली device एक IoT device है. यह मौसम और जगह के आधार पर तापमान को मापती है.

IoT device निम्नलिखित कार्य कर सकती है:-

  • यह दूसरी connect हुई devices के साथ data को ट्रान्सफर करता है.
  • यह दूसरी devices से data को collect करता है और data को locally प्रोसेस करता है.
  • ये data को process करने के लिए centralized servers या cloud पर आधारित applications को भी send कर सकता है.

नीचे चित्र में, IoT devices का एक block diagram दिया गया है.

iot devices block diagram in hindi

एक IoT device में दूसरे devices से connect करने के लिए बहुत सारें interfaces होते हैं. इसमें wired और wireless दोनों प्रकार के interfaces होते हैं:-

  • sensors के लिए I/O interface.
  • internet connectivity के लिए interface.
  • memory और storage interface.
  • audio/video interfaces.

IoT Protocols –

IoT protocols की मदद से ही internet में IoT devices और cloud पर आधारित servers के मध्य communication हो पाता है. नीचे आपको इसका चित्र दिया गया है जिसमें सभी IoT protocols दिखाए गये हैं:-

IoT protocols in hindi

Link Layer (लिंक लेयर) –

यह layer यह निर्धारित करती है कि network में data को physically कैसे भेजा जाता है. यह लेयर यह भी निर्धारित करती है कि हार्डवेयर डिवाइस के द्वारा packets को कैसे code और signal किया जाता है. इसके अंतर्गत निम्नलिखित protocols का प्रयोग किया जाता है:-

Network Layer (नेटवर्क लेयर) –

यह लेयर source network से destination network तक IP datagrams को भेजने के लिए जिम्मेदार रहती है. इस लेयर का कार्य host addressing और packet routing का होता है. हम IPv4 और IPv6 का प्रयोग host को identify करने के लिए करते हैं. इसमें प्रयोग किये जाने वाले protocols निम्नलिखित हैं:-

  • IPv4
  • IPv6
  • 6LoWPAN

Transport Layer (ट्रांसपोर्ट लेयर) –

इस लेयर का कार्य error control, segmentation, flow control और congestion control का होता है. इस layer के अंदर निम्नलिखित protocols शामिल रहते हैं:-

Application Layer (एप्लीकेशन लेयर) –

यह लेयर user को कम्युनिकेशन उपलब्ध कराती है; जैसे:- वेब ब्राउज़र, ई-मेल, तथा अन्य applications के द्वारा। इस layer में निम्नलिखित protocols प्रयोग किये जाते हैं.

    • HTTPS
    • CoAP
    • WebSocket
    • MQTT
    • XMPP
    • DDS
    • AMQP

कम्प्यूटर के अनुप्रयोग – Application of computer in Hindi

कम्प्यूटर के अनुप्रयोग – Application of computer in Hindi

कम्प्यूटर के अनुप्रयोग – Application of computer in Hindi

कंप्यूटर एक बहुत पावरफुल मशीन है आज हर क्षेञ में कंप्यूटर का अनुप्रयोग किया जा रहा है, एग्‍जाम में भी कम्प्यूटर के अनुप्रयोग (Application of computer) के बारे में प्रश्‍न पूछे जाते हैं तो आईये जानते हैं कम्प्यूटर के अनुप्रयोग – Application of computer

 

कम्प्यूटर के अनुप्रयोग – Application of computer in Hindi

  • डाटा प्रोसेसिंग (Data processing) – बडें और विशाल पैमाने पर डाटा प्रोसेसिंग (Data processing) करने के लिये और सूचना तैयार करने के लिये कंप्‍यूटर का प्रयोग किया जाता है इससे डाटा इकठ्ठा करना उसका विश्‍लेशण करना और सूचना प्राप्‍त करना बहुत आसान हो जाता है 
  • शिक्षा (Education) – कंप्‍यूटर में आधुनिक शिक्षा की तस्‍वीर ही बदल दी है, आज इन्टरनेट के मध्यम से हम किसी भी विषय की जानकारी कुछ ही क्षणों में प्राप्त कर सकते हैं, स्‍कूल और कॉलेजों को भी इंंटरनेट से जोड दिया गया है तथा कई जगहों पर स्‍मार्ट क्‍लास पर जोर दिया जा रहा है जो कंप्‍यूटर की वजह से ही संभव है 
  • बैंक (Bank)- बैंकिंग क्षेत्र में तो कम्प्यूटर के उपयोग ने क्रांति ही ला दी है, पुराने जमाने के बही खाते और रजिस्‍टर की जगह कंप्‍यूटर ने ले ली है बैंकों के अधिकांश कार्य कंप्‍यूटर के माध्‍यम से ही हो रहे हैं जैसे पैसे निकालना और जमा करना, यहां तक कि रूपया गिनने के ि‍लिये भी कंंम्‍यूटरीक्रत मशीने उपलब्‍ध हैं 
  • संचार (Communication)- 4जी इंटरनेट को आज बच्‍चा-बच्‍चा प्रयोग कर रहा है कंप्‍यूटर तकनीक ने ही संचार के क्षेत्र में इन्टरनेट के प्रयोग को अम्भव बनाया है और इन्टरनेट ने संचार क्रांति को जन्म दिया
  • मनोरंजन (Recreation)- मल्टीमिडिया के प्रयोग ने तो कम्प्यूटर को बहुयामी बना दिया है, कम्प्यूटर का प्रायः सिनेमा, टेलीविजन, वीडियो गेम खेलने के लिये भी किया जाता है 
  • प्रशासन (Governance) – हर एक संस्थान में अपना एक आंतरिक प्रशासन होता है और प्रशासनिक कार्य कम्प्यूटर से ही किये जाते हैं, साथ ही साथ सरकारी योजनओं का लाभ भी ई-शासन (E-governance) के रूप में आज जनों के घराेें तक पहुॅच रहा है 
  • सुरक्षा (Security)- आज बिना कम्प्यूटर के हमारी सुरक्षा व्यवस्था बिलकुल कमजोर हो जाएगी | एयरक्राफ्ट ट्रैक करने में, हवाई हमल, सीसीटीवी कैमरे में कम्प्यूटर का उपयोग होता है
  • वाणिज्य (Commerce) – दुकान, बैंक, बीमा, क्रेडिट कंपनी, आदि में कम्प्यूटर का अधिकतम उपयोग होता है | कम्प्यूटर के बिना काम करना वितीय दुनिया के लिए असंभव हो गया है
  • उद्योग (Industry)- बहुत सारे औधोगिक संस्थान; जैसे स्टील, कैमिकल, तेल कंपनी आदि कम्प्यूटर पर निर्भर हैं | संयंत्र प्रक्रियाओं के वास्तविक नियंत्रण के लिए भी कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं
  • चिकित्सा (Medicine) – चिकित्सा के क्षेत्र में कम्प्यूटर का अनुप्रयोग विभिन्न शारीरिक रोगों का पता लगाने के लिए किया जाता है, रोगों का विश्लेषण और निदान भी कम्प्यूटर के द्वारा संभव है, आधुनिक युग में एक्स रे, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड इत्यादि विभिन्न क्षेत्र में कम्प्यूटर का व्‍यापक उपयोग हो रहा है

 

Block Diagram along its components and characteristicsकंप्यूटर के भाग

Basic Components of A Computer System/ Block Diagram
(कंप्यूटर के अवयव और ब्लाक डायग्राम)

1. Input Device

Input Device वे Device होते है जिनके द्वारा हम अपने डाटा या निर्देशों को Computer में Input करा सकते हैं| Computer में कई Input Device होते है ये Devices Computer के मस्तिष्क को निर्देशित करती है की वह क्या करे? Input Device कई रूप में उपलब्ध है तथा सभी के विशिष्ट उद्देश्य है टाइपिंग के लिये हमारे पास Keyboard होते है, जो हमारे निर्देशों को Type करते हैं|

“Input Device वे Device है जो हमारे निर्देशों या आदेशों को Computer के मष्तिष्क, सी.पी.यू. (C.P.U.) तक पहुचाते हैं|”

Input Device कई प्रकार के होते है जो निम्न प्रकार है –

  • Joystick
  • Trackball
  • Light pen
  • Touch screen
  • Digital Camera
  • Scanner
  • Digitizer Tablet
  • Bar Code Reader
  • OMR
  • OCR
  • MICR
  • ATM etc.

 

 

2. C.P.U.

C.P.U का पूरा नाम सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) हैं| इसका हिंदी नाम केन्द्रीय संसाधन इकाई होता हैं| यह Computer का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता हैं| अर्थात इसके बिना Computer सिस्टम पूर्ण नहीं हो सकता है, इससे सभी Device जुड़े हुए रहते है जैसे- Keyboard, Mouse, Monitor आदि | इसे Computer का मष्तिस्क (Mind) भी कहते है| इसका मुख्य कार्य प्रोग्राम (Programs) को क्रियान्वित (Execute) करना है इसके आलावा C.P.U Computer के सभी भागो, जैसे- Memory, Input, Output Devices के कार्यों को भी नियंत्रित करता हैं|

C.P.U (Central Processing Unit) के तीन भाग होते है –

  • A.L.U.
  • C.U.

(a) A.L.U (Arithmetic Logic Unit)

एरिथ्मेटिक एवं लॉजिक यूनिट को संक्षेप में A.L.U  कहते हैं| यह यूनिट डाटा पर अंकगणितीय क्रियाएँ (जोड़, घटाना, गुणा, भाग) और तार्किक क्रियायें (Logical operation) करती हैं| A.L.U Control Unit से निर्देश लेता हैं| यह मेमोरी (memory) से डाटा को प्राप्त करता है तथा Processing के पश्चात सूचना को मेमोरी में लौटा देता हैं| A.L.U के कार्य करने की गति (Speed) अति तीव्र होती हैं| यह लगभग 1000000 गणनाये प्रति सेकंड (Per Second) की गति से करता हैं| इसमें ऐसा इलेक्ट्रॉनिक परिपथ होता है जो बाइनरी अंकगणित (Binary Arithmetic) की गणनाएँ करने में सक्षम होता हैं|

 (b) Memory

यह Input Device के द्वारा प्राप्त निर्देशों को Computer में संग्रहण (Store) करके रखता है इसे Computer की याददाश भी कहाँ जाता है| मानव में कुछ बातों को याद रखने के लिये मष्तिस्क होता है, उसी प्रकार मेमोरी (Memory) हैं| यह मेमोरी C.P.U का अभिन्न अंग है, यह एक संग्राहक उपकरण (Storage Device) हैं| अतः इसे Computer की मुख्य मेमोरी (Main memory), आंतरिक मेमोरी (Internal Memory), या प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory) भी कहते हैं|

“Computer का वह स्थान जहाँ सभी सूचनाओ, आकडों या निर्देशों को Store करके रखा जाता है मेमोरी कहलाती हैं|”

(c) C.U.

C.U. का पूरा नाम कंट्रोल यूनिट (Control Unit) होता हैं| C.U. हार्डवेयर कि क्रियाओ को नियंत्रित और संचालित करता हैं| यह Input, Output क्रियाओ को नियंत्रित (Control) करता है साथ ही Memory और A.L.U. के मध्य डाटा के आदान प्रदान को निर्देशित करता है यह प्रोग्राम (Program) को क्रियान्वित करने के लिये निर्देशों को मेमोरी से प्राप्त करता हैं| निर्देशों को विधुत संकेतों (Electric Signals) में परिवर्तित करके यह उचित डीवाइसेज तक पहुचता हैं|

Object Oriented Programming using Java’ Vidya Question Bank PDF

Object Oriented Programming utilizing Java’ Vidya Query Financial institution PDF

up polytechnic Laptop Science Engineering 4th sem ‘Object Oriented Programming utilizing Java’ Vidya Query Financial institution PDF

 

Up polytechnic ki Laptop Science Engineering ki 4th semester ki ‘Object Oriented Programming utilizing Java’ ki Vidya Query Financial institution ki PDF Free me obtain kare.

 

Download

Network Administration and Security (NAS)’ Vidya Question Bank PDF

up polytechnic Laptop Science Engineering  sixth sem ‘Community Administration and Safety (NAS)’ Vidya Query Financial institution PDF

Network Administration and Security (NAS)’ Vidya Question Bank PDF

Up polytechnic ki Laptop Science Engineering ki sixth semester ki ‘Community Administration and Safety (NAS)’ ki Vidya Query Financial institution ki PDF Free me obtain kare.

 

Download

python Concept of String String manipulating & Indexing Creating String & Deleting String Various String Functions by unitdiploma

p

  • Concept of String.
  • String manipulating & Indexing
  • Creating String &  Deleting String
  • Various String Functions

String

Python string is the collection of the characters surrounded by single quotes, double quotes, or triple quotes. The computer does not understand the characters; internally, it stores manipulated character as the combination of the 0’s and 1’s.

Each character is encoded in the ASCII or Unicode character. So we can say that Python strings are also called the collection of Unicode characters.

In Python, strings can be created by enclosing the character or the sequence of characters in the quotes. Python allows us to use single quotes, double quotes, or triple quotes to create the string.

Example:

str=”Nielit”

print(type(str))

Output:

<class ‘str’>

In Python, strings are treated as the sequence of characters, which means that Python doesn’t support the character data-type; instead, a single character written as ‘N’ is treated as the string of length 1.

Creating String in Python

We can create a string by enclosing the characters in single-quotes or double- quotes. Python also provides triple-quotes to represent the string, but it is generally used for multiline string or docstrings.

Example:

#Use single quotes 

s1 = ‘Python Programming’ 

print(s1)

print(type(s1))

print(“***********************”)

#Use double quotes

s2 = “Python Programming” 

print(s2)

print(type(s2))

print(“***********************”)

#Use triple quotes 

s3 = ””’Triple quotes are generally used for 

represent the multiline or

docstring”’  

print(s3)

print(type(s3))

Output

Python Programming

<class ‘str’>

***********************

Python Programming

<class ‘str’>

***********************

”Triple quotes are generally used for 

represent the multiline or

docstring

<class ‘str’>

Strings indexing and splitting

Like other languages, the indexing of the Python strings starts from 0. For example, the string “HELLO” is indexed as given in the below figure.

Example

str = “PYTHON” 

print(str[0]) 

print(str[1]) 

print(str[2]) 

print(str[3]) 

print(str[4])

print(str[5])

# It returns the IndexError because 6th index doesn’t exist

print(str[6])  

Output

P

Y

T

H

O

N

IndexError: string index out of range

Slice operator [] in String

As shown in Python, the slice operator [] is used to access the individual characters of the string. However, we can use the: (colon) operator in Python to access the substring from the given string.

Example

Example

str =’HELLOWORLD’ 

print(str[-1]) 

print(str[-3]) 

print(str[-2:]) 

print(str[-4:-1]) 

print(str[-7:-2]) 

# Reversing the given string 

print(str[::-1])

# Search Character out of index

print(str[-12])

Output

D

R

LD

ORL

LOWOR

DLROWOLLEH

print(str[-12])

IndexError: string index out of range

Reassigning Strings

Updating the content of the strings is as easy as assigning it to a new string. The string object doesn’t support item assignment i.e., A string can only be replaced with new string since its content cannot be partially replaced. Strings are immutable in Python.

Example

str = “PYTHON”   

str[0] = “p”   

print(str)

Output

str[0] = “p“

TypeError: ‘str’ object does not support item assignment

Example

str = “PYTHON”

print(str)

str= “python”   

print(str)

output:

PYTHON

python

Deleting the String

As we know that strings are immutable. We cannot delete or remove the characters from the string.  But we can delete the entire string using the del keyword.

str=”PYTHON”

print(str)

del str[0]

#print String after delete

print(“*******”)

print(str)

Output:

del str[0]

TypeError: ‘str’ object doesn’t support item deletion

Example

str=”PYTHON”

print(str)

del str

#print String after delete

print(“*******”)

print(str)

Output:

PYTHON

*******

<class ‘str’>

String Operators

OperatorDescription
+It is known as concatenation operator used to join the strings given either side of the operator.
*It is known as repetition operator. It concatenates the multiple copies of the same string.
[]It is known as slice operator. It is used to access the sub-strings of a particular string.
[:]It is known as range slice operator. It is used to access the characters from the specified range.
inIt is known as membership operator. It returns if a particular sub-string is present in the specified string.
not inIt is also a membership operator and does the exact reverse of in. It returns true if a particular substring is not present in the specified string.
%It is used to perform string formatting. It makes use of the format specifies used in C programming like %d or %f to map their values in python. We will discuss how formatting is done in python.

Example on String Operator:

str1 = “Python”    

str2 = “Program”   

print(str1*3) # prints PythonPythonPython 

print(str1+str2)# prints PythonProgram    

print(str1[4]) # prints o               

print(str2[2:4]); # prints og                   

print(‘h’ in str1) # prints True as “h” is  present in str1

print(‘m’ in str1) # prints False as “m” is not present in str1

print(‘am’ not in str2) # prints False as “am” is present in str2.

print(‘n’ not in str2) # prints True as “n” is not present in str2.

print(“The string str : %s”%(str1)) # prints The string str : Python

Output

PythonPythonPython

PythonProgram

o

og

True

False

False

True

The string str : Python

String Functions

1.count()

The count() method returns the number of times a specified value appears in the string.

Syntax:  string.count(value, start, end)

ParameterDescription
valueRequired. A String. The string to value to search for
startOptional. An Integer. The position to start the search. Default is 0
endOptional. An Integer. The position to end the search. Default is the end of the string

Example: Return the number of times the value “apple” appears in the string:

txt = “I love apples, apple are my favorite fruit”

x = txt.count(“apple”)

print(x)

Output:  2

Example: Search from index 10 to 24:

txt = “I love apples, apple are my favorite fruit”

x = txt.count(“apple”, 10, 24)

print(x)

Output:  1

2.find()

The find() method finds the first occurrence of the specified value.

The find() method returns -1 if the value is not found.

Syntax: string.find(value, start, end)

ParameterDescription
ValueRequired. The value to search for
StartOptional. Where to start the search.Default is 0
EndOptional. Where to end the search. Default is to the end of the string

Example: To find the first occurrence of the letter “e” in txt:

txt = “Hello, welcome to my world.”

x = txt.find(“e”)

print(x)

Output:  1

Example 2: Where in the text is the first occurrence of the letter “e” when you only search between position 5 and 10?:

txt = “Hello,welcome to my world.”

x = txt.find(“e”, 5, 10)

print(x)

Output:  8

3-rfind(): The rfind() searches the string for a specified value and returns the last position of where it was found.

Example: 

  • The rfind() method finds the last occurrence of the specified value.
  • The rfind() method returns -1 if the value is not found.

Syntax:  string.rfind(value, start, end)

Example: Where in the text is the last occurrence of the string “nielit”?:

txt = “nielit has started o level course nielit”

x = txt.rfind(“nielit”)

print(x)

Output: 43

Example: Where in the text is the last occurrence of the letter “e” when you only search between position 5 and 10?:

txt = “Hello, welcome to NIELIT”

x = txt.rfind(“e”, 5, 10)

print(x)

Output: 8

Example: If the value is not found, the rfind() method returns -1

txt = “Hello, welcome to NIELIT”

x = txt.rfind(‘nielit’)

print(x)

Output:  -1

String Functions Contd..

4-capitalize(): 

This method converts the first character to upper case. The capitalize() method returns a string where the first character is upper case.

Example: Upper case the first letter in this sentence:

txt = “hello, welcome to NIELIT”

x = txt.capitalize()

print (x)

Output: Hello, welcome to nielit.

5-title() 

The title() method returns a string where the first character in every word is upper case. Like a header, or a title.

Example:

txt = “python programming using string”

x = txt.title()

print(x)

Output: Python Programming Using String

If the word contains a number or a symbol, the first letter after that will be converted to upper case.

Example: 

txt = ” 3rd generation python”

x = txt.title()

print(x)

Output: 3Rd Generation Python

Example: Note that the first letter after a non-alphabet letter is converted into a upper case letter:

txt = “hello b2b2b2 and 3g3g3g”

x = txt.title()

print(x)

Output: Hello B2B2B2 And 3G3G3G

6-lower()

The lower() method returns a string where all characters are lower case. Symbols and Numbers are ignored.

Example: txt = “Welcome To NIELIT”

x = txt.lower()

print(x)

Output: welcome to nielit

7-upper()

The upper() method returns a string where all characters are in upper case. Symbols and Numbers are ignored.

Example: txt = “Welcome To NIELIT”

x = txt.upper()

print(x)

Output: WELCOME TO NIELIT

8-islower()

The islower() method returns True if all the characters are in lower case, otherwise False. Numbers, symbols and spaces are not checked, only alphabet characters.

Example: txt = “hello world!”

x = txt.islower()

print(x)

Output: True

9-isupper()

The isupper() method returns True if all the characters are in upper case, otherwise False. Numbers, symbols and spaces are not checked, only alphabet characters.

Example: txt = “PYTHON PROGRAM”

x = txt.isupper()

print(x)

Output: True

10-istitle()

The istitle() method returns True if all words in a text start with a upper case letter, AND the rest of the word are lower case letters, otherwise False. Symbols and numbers are ignored.

Example:

a = “HELLO, AND WELCOME TO MY WORLD”

b = “Hello”

c = “22 Names”

d = “This Is %’!?”

print(a.istitle())

print(b.istitle())

print(c.istitle())

print(d.istitle())

Output:

False

True

True

True

11-replace()

The replace() method replaces a specified phrase with another specified phrase.

Syntax: string.replace(oldvalue, newvalue, count)

Parameter Values

ParameterDescription
oldvalueRequired. The string to search for
newvalueRequired. The string to replace the old value with
countOptional. A number specifying how many occurrences of the old value you want to replace. Default is all occurrences

Example: Replace all occurrence of the word “one”:

  txt = “one one was a race horse, two two was one too.”

  x = txt.replace(“one”, “three”)

  print(x)

Output: three three was a race horse, two two was three too.

Example: Replace the two first occurrence of the word “one”:

  txt = “one one was a race horse, two two was one too.”

  x = txt.replace(“one”, “three”, 2)

  print(x)

Output: three three was a race horse, two two was one too.

12-strip()

The strip() method removes any leading (spaces at the beginning) and trailing (spaces at the end) characters (space is the default leading character to remove)

Syntax  string.strip(characters)

Parameter Values

ParameterDescription
charactersOptional. A set of characters to remove as leading/trailing characters

Example: Remove spaces at the beginning and at the end of the string:

  txt = ” banana “

  x = txt.strip()

  print(x)

Output: banana

Example: Remove the leading and trailing characters other than space

txt = “,,,,,rrttgg…..apple….rrr”

x = txt.strip(“,.grt”)

print(x)

Output:  apple

String Functions Contd..

lstrip()

The lstrip() method removes any leading characters (space is the default leading character to remove)

Syntax  : string.lstrip(characters)

Where, character is Optional. A set of characters to remove as leading characters

Example: txt = “,,,,,ssaaww…..banana.. “

x = txt.lstrip(“,.asw”)

print(x)

Output:  banana..

Note: Only leading character on left side will be removed.

rstrip()

The rstrip() method removes any trailing characters (characters at the end a string), space is the default trailing character to remove.

Syntax:  string.rstrip(characters)

Where, characters is optional. A set of characters to remove as trailing characters

Example: txt = “banana,,,,,ssaaww…..”

x = txt.rstrip(“,.asw”)

print(x)

Output:  banana..   

Note: Only leading character on right side will be removed.

split():

The split() method splits a string into a list. You can specify the separator, default separator is any whitespace.

Syntax  string.split(separator, maxsplit)

ParameterDescription
separatorOptional. Specifies the separator to use when splitting the string. By default any whitespace is a separator
maxsplitOptional. Specifies how many splits to do. Default value is -1, which is “all occurrences”

Example: txt = “hello, my name is Peter, I am 26 years old”

  x = txt.split(“, “)

  print(x)

Output: [‘hello’, ‘my name is Peter’, ‘I am 26 years old’]

partition()

The partition() method searches for a specified string, and splits the string into a tuple containing three elements.

  • The first element contains the part before the specified string.
  • The second element contains the specified string.
  • The third element contains the part after the string.

Syntax  string.partition(value)

Where, value is required. The value is the string to search for

Example txt = “I could eat bananas all day”

x = txt.partition(“bananas”)

print(x)

Output: (‘I could eat ‘, ‘bananas’, ‘ all day’)

Search for the word “bananas”, and return a tuple with three elements:

1 – everything before the “banana”

2 – the “banana”

3 – everything after the “banana”

join()

The join() method takes all items in an iterable and joins them into one string. A string must be specified as the separator.

Example: join all items in a dictionary into a string, using a the word “and” as separator:

List1 =(“apple”,”Bannana”)

mySeparator = ” and “

x = mySeparator.join(List1)

print(x)

Output:  apple and Bannana

isspace()

The isspace() method returns True if all the characters in a string are whitespaces, otherwise False.

Example:  txt = ”   s   “

x = txt.isspace()

print(x)

Output:  False

python input and output function in hindi by unitdiploma

Input Function

•To accept input from keyboard, Python provides the input() function. This function takes a value from the keyboard and returns it as a string.

Example:

  str=input(‘enter you city: ‘)

  print(str)

  str=input(‘enter a number: ‘)

  x=int(str)

  print(x)

  x=int(input(‘enter any no.: ‘))

  print(x)

  x=float(input(‘enter any no.: ‘))

  print(x)

Output:
enter you city: gorakhpur
gorakhpur
enter a number: 4
4
enter any no.: 54
54
enter any no.: 37.5
37.5
 

Output Function

print() function is used to output data to the standard output device (screen).

  print(‘This sentence is output to the screen’)

          # Output: This sentence is output to the screen

  a = 5

  print(‘The value of a is’, a)

    # Output: The value of a is 5

Examples of Output Function

print(‘hello’)

print(‘hello \tPython’)

print(‘hello ‘*3)

print(‘hello’+’Python’)

a,b=2,4

print(a)

print(a,b)

print(a,b,sep=”,”)

print(a,b,sep=”:”)

print(a,b,sep=”____”)

print(“hello”)

print(“welcome”,end=””)

print(“python”)

print(1,2,3,sep=”,”,end=”&”)

Examples of Output Function

a,b,c=24,25,27

print(‘num1={}’.format(a))

a,b,c=10,20,30

print(‘num1={},num2={},num3={}’.format(a,b,c))

print(‘num1={0},num2={1},num3={2}’.format(a,b,c))

print(‘num1={2},num2={1},num3={0}’.format(a,b,c))

name,sal=’amit’,35200.00

print(‘Hi {0}, your salary is {1}’.format(name,sal))

print(‘Hi {x}, your salary is {s}’.format(x=name,s=sal))

Program to sum of two numbers

  a = int(input(“enter first number: “))

  b = int(input(“enter second number: “)) 

  sum= a + b

   print(“Sum of two numbers is:”, sum)

Problems

•The length & breadth of a rectangle and radius of a circle are input through the keyboard.

•Write a program to calculate the area & perimeter of the rectangle, and the area & circumference of the circle.

•Employee’s basic salary is input through the keyboard. His dearness allowance is 40% of basic salary, and house rent allowance is 20% of basic salary. Write a program to calculate his gross salary.

•If the marks obtained by a student in five different subjects are input through the keyboard, find out the aggregate marks and percentage marks obtained by the student. Assume that the maximum marks that can be obtained by a student in each subject is 100.

•The distance between two cities (in km.) is input through the keyboard. Write a program to convert and print this distance in meters, feet, inches and centimeters.

•Two numbers are input through the keyboard into two locations a and b. Write a program to interchange the contents of a and b.

Introduction and Features OOP in hindi by unitdiploma

OOP:-
ऑब्जेक्ट ओरिएन्टेड प्रोग्रामिग implementation की एक विधि है जजसिें program objects के cooperative
(सहकािी ) संग्रह के रूप िें संगठित िहते हैं जजनिें से प्रत्येक ऑब्जेक्ट ककसी Class के Instance का
Representation किता है एिं जजनकी Classes Inheritance relationship के द्िािा क्लासों की Hierarchy की
Member होती है
ऑब्जेक्ट ओरिएन्टेड प्रोग्रामिंग एक ऐसी अििािणा है जो डेटा तथा फंक्शन के मलए इस तिह अलग –
अलग Memory Area का ननिााण कि Program का िोड्य

किने के मलए टेम्पलेट की तिह प्रयोग ककया जा सकता है
ल की कॉपी
लिाइजेशन किते हैं जजससे उन्हें िोड्य

Need Of OOPS :-
High Level Language , जैसे – कोबॉल . फोरट्रॉन या C में ललखे प्रोग्रामप्रोसीजि ओरिएन्टेड प्रोग्रािकहलाते
हैं ।
इस प्रकार की प्रोग्रालमिंग में प्रोग्राम को ककये जाने वाले कायों के रूप में देखा जाता ै ह ।
इन कायों को करने के ललए एक से अधिक फिंक्शन ललखे जाते हैं ।
फिंक्शन के ववकास पर ध्यान केन्द्रित करते समय उस डेटा को भूल जाते हैं न्द्जसे इन फिंक्शन द्वारा
प्रयोग ककया जाता है ।
इसमें global dala का प्रयोग करते हैं अर् ाात एक ही Data बह

डेटा को आसानी से एक से द

त से प्रोग्राम द्वारा प्रयोग ककया जाता ै ह ।
इसमें फिंक्शन की अपेक्षा डेटा को प्रोग्राम के ववकास का महत्वप

स े र फिंक्शन में भेजा जा सकता है ।
र्ा अवयव माना जाता ै ह ।
इन सारी समस्याओिं से ननदान पाने के ललए ऑब्जेक्ट ओरिएन्टेड प्रोग्रामिंगका ववकास ककया गया है ।COVID-19

इसमें डेटा , उन फिंक्शन के सार् ही जुडे होते हैं न्द्जसमें इनका प्रयोग ककया जाता है ।
लसस्टम में Data को External Function द्वारा Independent रूप से बदले जाने की अन

मनत नहीिं होती ै ह ।
इसमें डेटा एविं इस पर ऑप े रट करने वाले फिंक्शन एक – दूस े र से ननकटता ( Nearest )
से बँिे होते हैं एविं यह बाहरी फिंक्शन द्वारा डेटा के आकन्द्स्मक बदलाव से स

रक्षा करती ै ह ।
ऑब्जेक्ट ओरिएन्टेड प्रोग्रामिंगमें समस्या को Entities में ववभान्द्जत ककया जा सकता ै ह न्द्जरहें ऑब्जेक्ट
कहते हैं और कफर इन ऑब्जेक््स के ललए डेटा एविं फिंक्शन बनते हैं । एक ऑब्जेक्ट का डेटा केवल उस
ऑब्जेक्ट से ज

डेह

ए फिंक्शन द्वारा एक्सेस ककया जा सकता ै ह जबकक एक ऑब्जेक्ट के फिंक्शन द

सेर
ऑब्जेक्टस के फिंक्शरस को एक्सेस कर सकते हैं ।
Features of Object Oriented Programming Language :-
Object Oriented Programming Language के ननम्न Features हैं, और इसके Basic Concept ननम्न हैं-

  1. Objects
  2. Class
  3. Data Abstraction
  4. Polymorphism
  5. Data Encapsulation or Data Hiding
  6. Inheritance
  7. Message Passing
  8. Reusability
  9. Dynamic Binding
  10. Objects
    यह OOPs की basic run-time entity है। जो कक ककसी object (person, place, a bank account etc.) को
    represent करता है।Object User define डेटा टाइप्स जैसे – वेक्टर , समय एविं सूची ( list ) आदद को भी
    प्रदलशात कर सकते हैं ।object, class का variable है जो कक class को execute करता है और उसमे उपलब्ि
    methods को use कर डाटा को process करता है। object के create होने पर यह memory मे अरय variables
    की तरह ही space लेता है।
    प्रोग्राम के ऑब्जेक््स का चयन इस प्रकार ककया जाना चादहए कक वे वास्तववक ववश्व के समान ही हों या
    उससे लमलता ज

    लता हो
  11. Class
    C + + में क्लास का अत्यधिक महत्व ै ह । इसी महत्ता के कारर् शुरू में इस भाषा का नाम ही विथ क्लास
    ‘ र्ा ।क्लास की Concept के प्रयोग के कारर् ही C + + प्रोसीजर भाषा के सार् – सार् ऑब्जेक्ट ओरिएन्टेड
    प्रोग्रामिंग की एक Advance भाषा बन सकी है । Class यूजर के द्वारा बनाये जाना वाला डेटा टाइप ै ह ।
    क्लास उन ऑब्जेक््स का समूह होती ै ह , न्द्जनके Property Same होते हैं एविं न्द्जनका व्यवहार व सिंबिंि (
    relationships ) सािारर् ( Common ) होता हैं । ऑब्जेक््स में डेटा एविं उस डेटा को मैननप

    जर
    ललए Code Contain रहता है ।एक ऑब्जेक्ट के डेटा एविं कोड का Complete set क्लास की सहायता से य

    लेट करने के
    ूजर – डडफाइरड है और क्लास एक प्रोग्रालमिंग भाषा के डेटा टाइप की तरह व्यवहार करता है
    चँकक क्लास य

    डडफाइरड डेटा टाइप बनाया जा सकता ै ह ।वास्तव में , ऑब्जेक््स क्लास टाइप के िेरियेबल होते हैं । एक
    बाि क्लास केपरिभावित होने के बाद , उस क्लास से संबंधित ( belonging ) ऑब्जेक््स के ककतने भी
    िेम्बि बनाए जा सकते हैं । प्रत्येक ऑब्जेक्ट क्लास टाइप के डेटा से associate रहता है , न्द्जससे वो बनता
    है ।अतः एक क्लास समान टाइप के ऑब्जेक््स का सिंग्रह होती है ।
    उदाहरर् – mango , apple एविं orange क्लास fruit के मेम्बर हैं |COVID-19

। अतः यदद fruit एक क्लास की तरह डडफाइन होता है , तब कर्न , fruit mango ; एक ऑब्जेक्ट Generate
करेगा जो fruit क्लास से सिंबिंधित है ।

  1. Data Abstraction
    Data Abstraction का आशय Total Complexity के Simplification से हैं
    डेटा एब्सट्रैक्शन में ककसी काया को Complete करने के ललए केवल आवश्यक ज्ञान ही पयााप्त है ,
    न कक उस काया की Internal Process एविं उससे सम्बन्द्रित Indirect ( अप्नत्यक्ष )रूप से होने वाले काया के

    की
    इस काया के ललए न्द्स्वच को दबाने से न्द्स्वच के अरदर क्या ह

    ज्ञान
    उदाहिण – लाइट ऑन करने के ललए न्द्स्वच बोडा पर केवल एक न्द्स्वच को दबाने का काया ककया जाता है ।
    आ न्द्स्वच के दबाने से लाइट कैसे ऑन
    होती है , यह सब जानने की आवश्यकता नहीिं होती है | यह गुर् एब्सट्रैक्शन कहलाता ै ह ।
  2. Polymorphism
    Polymorphism ‘ पॉली ‘ ( poly ) शब्द की उत्पवत्त ग्रीक शब्द से ह

    ई ै ह न्द्जसका अर्ा ै ह ‘ अनेक ‘ ( many )
  3. Data Encapsulation Or data Hiding
    Data Encapsulation ऑब्जेक्ट ओररएरटेड प्रोग्रालमिंग शैली का एक अत्यरत महत्वप



    एविं मॉकफाज्म ( morphism ) का अर्ा है । रूप ‘ ( form ) । अतः पॉलीमॉकफाज्म का अर्ा है ” अनेक रूप ‘ (
    many forms ) |
    ऑब्जेक्ट ओररएरटेड प्रोग्रालमिंग में पॉलीमॉकफाज्म का अर्ा ै ह , समान नाम के फिंक्शरस ( भेम्बर फिंक्शरस )
    इन फिंक्शरस का व्यवहार न्द्जन ऑब्जेक््स को वे Specify करते हैं , उनके आिार पर अलग – अलग होता
    है ।
    र्ा तथ्य ै ह । डेटा और
    लेशन कहलाता ै ह ।एनकैप्स

    फिंक्शन को एकल इकाई ( class ) में सिंगदित करना , एनकैप्स

    पाता ै ह और उपयोग हो सकने वाले ऑब्जेक्ट को स

    Internal Form को यजर से छ
    लेशन ऑब्जेक्ट के
    । इस प्रकार डेटा एनकैप्स

    एक Class की Properties ककसी द

    धचत भी करता है ।डेटा
    एनकैप्स
    ुलेशनअर् ाात् Functions व Data का Integration करना ।डेटा एनकैप्सुलेशन के द्वारा प्रोग्राम एविं डेटा
    इस प्रकार यह प

    लेशन एक रक्षक की तरह काया
  4. Inheritance
    इनहेररटेरस भी ऑब्जेक्ट ओररएरटेड प्रोग्राम शैली की एक महत्वपूर्ा एविं उपयोगी ववशेषता ै ह । इसके द्िािा
    ूस े र प्रोग्राम के द्वारा प्रभाववत नहीिं होते हैं
    ,द
    करता है
    सिे Class से प्राप्त की जा सकती हैं या Inherit की जा सकती हैं
    उदाहिण – मोटरसाइककल अपने आप में एक क्लास ै ह एविं यह द

    पदहया क्लास का मेम्बर ै ह । द

    है । पहले से बने क्लास को Base Class क्लास कहते हैं और नए क्लास कोDerived Class क्लास कहते हैं
  5. Message Passing
    वा में उपन्द्स्र्त ककसी क्लास का नए क्लास के रूप में पररभावषत करने की क्षमता रखता
    मोटरसाइककल एक द

    पदहया क्लास
    पदहया ऑटोमेदटव ै ह ।
    ऑटोमेदटव क्लास का सदस्य है एविं ऑटोमेदटव बेस क्लास ै ह और दुपदहया डडराइब्ड क्लास ै ह । इस प्रकारCOVID-19

Stay home Stay Safe

GPM

Message Passing ऑब्जेक्ट ओररएरटेड प्रोग्रालमिंग में , ऑब्जेक्ट ओररएरटेड प्रोग्राम अनेक ऑब्जेक््स के सम


होते हैं , जो आपस में एक – द

स े र को आवश्यकता पडने पर मैसेज Send हैं और Receive भी करते हैं ।
उदाहिण – मैसेज पालसिंग ऑब्जेक्ट का नाम , ववधि ( method ) का नाम और स

होता है । अतः मैसेज प्राप्त करके ऑब्जेक्ट एक ननन्द्श्चत प्रकिया को Implement करके Result प्रस्त
त करता

है ।
ककसी ऑब्जेक््स के ललए एक मैसेज एक ननन्द्श्चत प्रकिया अर्वा फिंक्शन को Implement करने के ललए
चना जो भेजना ै ह , को अपने
में रखता ै ह । जैसे –
Statement employee. salary ( name ) ; यहाँ employee Object है , salary मैसेज है । और name पैरामीटर है
ूचना ( information ) को एकत्र करता है
जो स

  1. Reusability
    Reusability एक नई क्लास ललखने , Create करने और Debug करने के बाद इसे द

    स े र प्रोग्राम्स में उपयोग
    के ललए Distributed ककया जा सकता है , इसे ररय

    जेबबललटी कहा जाता ै ह ।
    रिय
  2. एक एप्लीकेशन में स

    यह ककसी प्रोसीजरल लैंग्वेज में फिंक्शन की लाइब्रेरी को लभरन प्रोग्राम में जोडने के समान ै ह । Reusability की
    Concept डेटा ऑपरेशरस के Abstraction और Encapsulation के सार् Generate होती है ।
    चनाओिं को शेयर ककया जाता ै ह ।
    जेबबमलटी िें ऑब्जेक्ट ओरिएन्टेड डेिलपिेन्ट ननम्नमलखित प्रकाि से होता है-
    त्तर में
  3. Future Projects में कोड और डडजाइरस का Reuse ककया जाता है ।
  4. Dynamic Binding
    बाइिंडडिंग प्रोसीजर कॉल की उस डेटा से किया को denote करती है , न्द्जसे प्रोसीजर कॉल के प्रत्य

    यह पॉलीमॉकफाज्म और इनहेररटेरस से सिंबिंधित होती ै ह । पॉलीमॉकफाक े रफ े ररस से ज

    उस रेरेरस के डायनेलमक टाइप पर ननभार करता है
    Advantage Of OOPS :-
    Object Oriented Programming Language के ननम्नमलखित लाभ ैं ह:-
    प्रोग्राम के द

    डा एक फिंक्शन कॉल
    वाक ) Operational हेत

    Objects के सम

    ूट ककया जाता है । डायनेलमक बाइिंडडिंग का अर्ा दी गई प्रोसीजर कॉल से सिंबिंधित कोड की जानकारी
    एक्जीक्य
    कॉल के रनटाइम के समय तक न होना है ।
    स े र भागों में प्रयोग नहीिं ककया जा सकता ै ह ।
    हों के
  5. OOP की तकनीक से एक Program को Quickly (शीघ्रताप

    आिार पर अनेक भागों में ववभक्त ककया जा सकता है ।
  6. इस तकनीक से छोटे – छोटे Program के Combination द्वारा Large Program सरलताप

    जा सकते हैं
  7. इस पद्िनत में Inheritance के द्वारा redundant code को हटाया जा सकता है एविं पहले से उपन्द्स्र्त
    Classes के उपयोग को extend ककया जा सकता है ।
  8. डेटा हाइडडिंग का Concept प्रोग्रामर को सुरक्षक्षत प्रोग्राम बनाने में सहायता करता ै ह न्द्जसे कोड द्वारा
    वाक तैयार ककएCOVID-19

  1. इसके द्वारा कायारत स्तरीय मॉड्य


लों से हो जाता ै ह , न्द्जससे

लों का सिंबिंि सरलतापवाक द
स े र मॉड्य
गम और सरक्षक्षत हो जाता ै ह ।

कोड को बार – बार नहीिं ललखना पडता है , न्द्जसके कारर् प्रोग्राम में समय की बचत होती ही ै ह तर्ा
Develop की क्षमता में वृद्धि होती ै ह ।

  1. इस तकनीक के द्वारा Object की Classes के सार् उनसे सिंबिंधित Functions को भी integrated कर
    ददया जाता है , न्द्जससे प्रोसेलसिंग का काया स




    Java Class and Object:-
    Class:-
    java में सब क

    डा ह
  2. Objects के बीच Communication के ललए मैसेज पालसिंग Method द्वारा External System के सार्
    इिंटरफेस करना आसान होता है ।
  3. इस प्रोग्रालमिंग के द्वारा सॉफ्टवेयर जदटलता ( complexity ) को आसानी से हल ककया जा सकता है
  4. सॉफ्टवेयर ववकलसत ( develop ) करना आसान होता है ।
    ज़
    एक class object का एक group है। यह एक Template या blueprint है न्द्जसमें से object
    बनाए जाते हैं। यह एक logical entity है। यह physical entity नहीिं हो सकता।
    और रिंग, जैसे ड्राइव और ब्रेक जैसी ववशेषताएिं हैं।
    A class in Java can contain:
     Fields
     Methods
     Constructors
     Blocks
     Nested class and interface
    Create a Class:-
    आ है। उदाहरर् के ललए: वास्तववक जीवन में, एक car एक object है। car में वजन
    छ class और object के सार्-सार् इसकी ववशेषताओिं और method के सार्
    String Name = “Ankit”;
    int age = 20;
    public void display()
    त ही easy है इसके ललए आप class keyword का य

    Java में class create करना बह

    करते है।
    class Student
    {COVID-19
    {
    }

GPM

Stay home Stay Safe

System.out.println(“Name is “+Name+”Age is”+age);
public static void main(String args[])
{
this.Show();
}
}
उदाहरर् में Student नाम की एक class create की गयी है। इस class में name और age
दो variables है। इसमें Show() नाम से method भी declare ककया गया है।
Java Object:-
Java में, Class से Obejct बनाया जाता है। हमने पहले ही Student नाम की Class बना
ली र्ी, इसललए अब हम इसका इस्तेमाल object बनाने के ललए कर सकते हैं।
यदद हम वास्तववक दुननया पर ववचार करते हैं, तो हम अपने आस-पास कई object, car,
dogs, humans आदद को पा सकते हैं। इन सभी वस्त

होता है।
Create an object:-
public class Student{
int x = 5;
String Name = “Ankit”;
int age = 20;
public void display()
{
ओिं का एक State और एक Behaviour
}
}
}
public static void main(String args[])
{
this.Show();
}
public static void main(String[] args) {
Student myobj = new Student();
System.out.println(myobj.x);
}
System.out.println(“Name is “+Name+”Age is”+age);COVID-19

Stay home Stay Safe

GPM

सबसे पहले हमे object बना ने के ललए जावा basic syntax ललखा उसके बाद । जब
आप कोई भी object create करते है तो सबसे पहले उस class का constructor call होता
है। contructor बना ने के ललए हमे brackets का य

ज़ करना पडता है।
उसके बाद object print करने के ललए System.out.println (myobj.x); ललखा हमने।
इस तरह से Java मैं Class और Object बनाए जाते है।
Abstraction & encapsulation-
Data तर्ा function को एक single unit में wrap करना encapsulation कहलाता है तर्ा वह single
unit न्द्जससे data wrap ह

Inheritance:-
आ है class कहलाती है, एक class के अिंदर data outside world से access
नही ककया जा सकता, अगर जरुरी features को show कर background detail को hide कर ददया जाये
तो यह तरीका data abstraction कहलाता है।
Java में Inheritance ये Object Oriented Programming का एक प्रकार है | न्द्जसमे एक class की
properties और methods ककसी दुस े र class में inherit की जाती है |
ुख्यतः Parent class और child class का इस्तेमाल ककया जाता है | इसमे
Inheritance में म
Parent class को Base class या super class भी कहा जाता है और Child class को Derived
class या sub class भी कहा जाता है | C++ ये Inheritance के प्रकार को support करता है,
लेककन Java; Multiple Inheritance को support नहीिं करता मतलब Java में Parent class को
कई child classes हो सकते है, लेककन child classes को लसफा एक ही Parent class होता है |# Stay home Stay Safe
COVID-19
Sample Inheritance

Java में Inheritance के ललए extends keywword का इस्तेमाल ककया जाता है |
Syntax for Inheritance
class parent_class{
//statements;
}
class child_class extends parent_class{
//statements;
}
Example for Inheritance
यहाँ example में A ये एक parent class है और B ये child class है | B class; A class की सभी
properties; inherit कर सकता है |
class A{
//statements;
}
class B extends A{
//statements;COVID-19

}
Full Example for Inheritance
Source Code :
//B.java
class A{
void disp(){
System.out.println(“Parent Class”);
}
}
class B extends A{
void show(){
System.out.println(“Child Class”);
}
public static void main(String args[]){
B obj = new B();
obj.disp();
obj.show();
}
}
Parent Class
Child Class
Output :
Java में तीन Inheritance होते है |# Stay home Stay Safe

GPM

COVID-19

  1. Single Inheritance
  2. MultiLevel Inheritance
  3. Hierarchical Inheritance
  4. Single Inheritance
    //B.java
    class A{
    Source Code :
    void disp(){
    System.out.println(“Parent Class”);
    }
    }
    class B extends A{
    void show(){
    System.out.println(“Child Class”);
    }
    public static void main(String args[]){
    B obj = new B();
    obj.disp();
    obj.show();
    }
    }
    Parent Class
    Output : COVID-19

Child Class

  1. Multilevel Inheritance
    //C.java
    class A{
    Source Code :
    void disp(){
    System.out.println(“Class A”);
    }
    }
    class B extends A{
    void show(){
    System.out.println(“Class B”);
    }
    }
    class C extends B{
    void getdata(){
    System.out.println(“Class C”);
    }
    public static void main(String args[]){COVID-19

C obj = new C();
obj.disp();
obj.show();
obj.getdata();
}
}
Class A
Class B
Class C
Output :

  1. Hierarchical Inheritance
    //C.java
    class A{
    void disp(){
    System.out.println(“Class A”);
    }
    Source Code : COVID-19

Stay home Stay Safe

GPM

}
class B extends A{
void show(){
System.out.println(“Class B”);
}
}
class C extends A{
void getdata(){
System.out.println(“Class C”);
}
public static void main(String args[]){
C obj = new C();
obj.disp();
obj.getdata();
B b = new B();
b.show();
}
}
Class A
Class C
Class B
Output : # Stay home Stay Safe
COVID-19
Multiple Inheritance

GPM

Multiple Inheritance के ललए Java में एक से ज्यादा Base classes होते है और सभी base
classes को एक ही derived class inherit करता है |
Java में Multiple Inheritance; support नहीिं करता है ,लेककन interface के माध्यम से multiple
Inheritance Java में support करता है |
Multiple Inheritance; Java िें support क्यों नहीं किता ?
Java में जब Multiple Inheritance आता है, तब Ambiguity problem आ जाता है | Java में
extends के सार् कहा पर भी Multiple Inheritance का उल्लेख नहीिं ककया गया है | लेककन
interface में इसे इस्तेमाल ककया जा सकता है |
Java में एक से ज्यादा parent class नहीिं हो सकते | Program में तीन class है | C class; A और
B इन दोनों class को inherit करता है | Source Code :
}
class B{
//C.java
class A{
void disp(){
System.out.println(“Class A”);
}
void show(){
System.out.println(“Class B”);
}
}
class C extends A, B{COVID-19

Search engine optimization(seo) in hindi

Search engine optimization(seo) :- यह एक ऐसी तकनीक है जिससे हम अपने वेबपजे को सर्च मे टॉप (top) मे लाते है सर्च इंजिन optimization मे keyword type के जरिये no 1 position पर लाते है 

जैसे keyword,metadata,etc| 

Search engine marketing google adwords:- Search engine marketing google adwords के साथ हम अपने वेबसाइट  या पोस्ट को प्रथम स्थान पर लाते है

Search engine marketing free marketing और paid marketing भी होता है इससे हम अपने पजे को सर्च इंजिन मे top पर करते है,गूगल अड्वोर्ड्स को गूगल कंपनी ने ads मार्केट  करने के लिए बनाया गया है  

SEM-Search-engine-marketing.jpg

Search Engine में Ads Show होने वाले Results को ही SEM कहते है 

google adwords के  कुछ Ads है ।

1.PPC- Pay Per Click
2.PPC- Pay Per Call
4.CPC- Cost Per Click
5. CPM (cost-per-thousand impressions)
6.Paid Search Advertising

Social Media Marketing:- Social Media Marketing, social sites पर हम अपनी blog, Brand या product को promote करने के लिए जो भी strategy apply करते है उसे social media marketing कहते है,

smm.jpg

Social Media Marketing एक Internet Marketing का एक form है जहाँ हम ऐसे हजारों content create और share करते ह Social Media पर के वल अपने या किसी दुसरे company के Marketing और Branding Goals को achieve करने के लिए . इस social media marketing म ऐसे कई activities शामिल है जैसे की text और image updates को post करना, videos को post करना और ऐसे ही अलग content जिससे की audience engage हों. ये companies को एक रास्ता बनाकर के देती है की कैसे आप अपने नए customers और पुराने के साथ engage रहे |

  • Facebook:- Facebook World की सबसे popular social network site है Facebook. जहा पर anytime आपको million users active मिलेंगे. और अगर आप शिर्फ़ India जो कि second largest online market हे यहा पर भी आपको monthly 241 million + active users मिलेंगे.

और Facebook पर marketing के लिए आपकोFacebook Tips & Tricks के बारे में जानना होगा. और अपनी Brand की एक page create करना होगा फिर आप इसपर free और paid जैसे भी अपनी blog या product की promotion कर सकते हो,और Advertising on Facebook के जरिये आप लाखो visitors या Customers Recived कर सकते हो.

facebook.jpg
  • LinkedIn :- LikedIn भी एक professional network site है. और इसपर आपको शिर्फ़ professional लोग ही ज्यादा मिलेंगे. तो इस social media site पर भी आप अपनी content को promote करके अपनी business की Promotion कर सकते है.
LinkedIn.png
  • YouTube:- Digital marketing के लिए के लिए YouTube भी एक बहुत ही बढ़िया social media site है. इसपर आप अपनी blog को promote करने के लिए video create करे और videos पर अपनी products के बारे में बताए. जिसे आप बहुत से लोगो को attract कर सकते हो. और अपनी blog पर traffic भी increase कर सकते हो.
youtube.jpg

social Media Marketing आपके Business में कैसे लाभ देता है ?

Social media marketing से आप अपने बहुत से Marketing लक्ष को पा सकते हैं जो की कुछ इस प्रकार हैं-

  1. जब आप social media पर रहते है तो इससे आपकी Website traffic बढ़ सकती है।
  2. इससे आप दूसरों के साथ बातचीत कर अपने relation को और मजबूत कर सकते हैं जिससे आपके ब्रांड को एक अलग पहेचन मिलता है।
  3. इससे आपकी Brand Awareness बढ़ सकती है और ज्यादा से ज्यादा लोग आपके बारे में जानेंगे जिसके द्वारा भी आपके business में लाभ होगा।
  4. आपकी एक अलग Brand identity बनेगी और आपके ब्रांड पर लोग भरोशा करने लगेंगे।
  5. इससे आप अपने Audience के साथ बेहतर interact कर सकते हैं जो की आपके Brand के value के लिए अच्छा है।

Display Advertising – Display Advertising का प्रयोग करके किसी  प्रोडक्ट का Image, Video, GIF किसी Online Platform पर Display करते हैं.उसे Display Advertising कहते है 

 display.pngExample : यदि कोई Advertiser हमारे Website पर Advertise करना चाहता है तो हम उसके Image / Video को Site के किसी पार्ट में अपने Readers को दिखायेंगे. Display Advertising सिर्फ Awareness के लिए किया जाता है.

Contextual advertisement:- Contextual advertisement वेबसाइट 

या अन्य मीडिया पर प्रदर्शित होने वाले विज्ञापनों के लिए लक्षित(Targeted) विज्ञापन का एक रूप है

जैसे किसी मीडिया या वैबसाइट पर व्यक्ति जो भी देखना या सर्च करना चाहता है उससे related ads दिखाये जाते है 

Behavioral advertisement :-Behavioral advertisement का प्रयोग किस प्रकार का page या post को लिखा गया है उस प्रकार का ads दिखाया जाता है 

Targeted advertisement :- Targeted advertisement किसी टारगेट व्यक्ति को advertisement दिखाने के लिए Targeted advertisement का प्रयोग किया जाता है यह advertisement कितने समय तथा कब तक सीमित रहेगा |

, Content Marketing & Blogging:- जसके मायम से Valuable content को बनाया जाता है और उसे share भी कया जाता है जससे क ये customers को अपनी और आकषत कर सके और उह repeated buyer म बदल सक. आप जो भी content share करते ह वो आपके उन चीज़ से काफ समानता रखता हो जो आप बेचते ह, या हम ये भी कह सकते ह क आप लोग को अछ जानकारी देते ह, उह शत करते ह ताक वो आपके वषय म जान सक, आपको पसंद कर सक और आपके ऊपर ववास कर सक जससे वो आपके साथ आगे business कर सके 

जैसे 1. Infographics. ये मुयतः लबे, verticla graphics होते ह जसम Statistics, charts, graphs और सरे जानकारी को लखा जाता है. इनम Images के साथ उनम सबंधत जानकरी भी दान क जाती है. आपके marketing के लए Infographics बत effective बन सकते ह अगर उह सही तरीके से बना जाये और उह सही तरीके से Share कया जाये. इन Infographics को आप खुद भी बना सकते ह या कसी सरे professional के द्वारा भी बना सकते ह.

2. Webpages. Normal Webpages और एक Content Marketing Webpages म काफ अंतर है. यूंक यद आप कसी Webpages को अछ तरीके से लख और उह सही तरीके से SEO optimized कर तब इससे आप बत से लोग को अपनी और आकषत कर सकते ह. यूंक ये आसानी से Rank हो जायेगा जो क आपके Brand के लए बत ही अछा है.

3. Podcasts. Content Marketing म Podcasts का भी काफ महव है. ये आपके Contents को लोग के सामने अछे तरीके से दशत करता है. जससे यादा से यादा लोग आपके वषय म जान सक. इससे आपके Brand क publicity भी हो जाती है.

4. Videos. कहते ह क Text क तुलना म Videos बत ही आकषक होते ह और इह आसानी से share भी कर सकते ह. Videos म customers आपके content के वषय म अछे तरीके से जानते ह और उसे देखते ह जससे उनम आपके content को लेकर ववास उपन होता है. इससे आपके Brand क value बढ़ जाती है जो क आपके Branding Value के लए बत महवपूण है 

5. Books या Text. Text एक बत ही महवपूण तरीका है content marketing के लए. यहाँ Marketers अछे content लखकर लोग को अपनी तरफ आकषत कर सकते ह. वैसे ही आप Books का इतमाल एक Marketing tool के हसाब से भी कर सकते ह. इससे आपका Branding Value भी बढ़ता है और लोग का आपके ऊपर ववास भी बढ़ जाता है.

Lead Generation : Lead Generation एक marketing term है जिसे  की  describe किया जाता है एक connection बनाया जाता है एक potential customer या client के साथ. ज्यादातर Online Advertising का मुख्य  लक्ष्य  होता है Leads generate करना, जो की बाद मे  एक company या organization के लए sales या subscriptions generate कर सके 

ऐसी leads generate  किया जाता है Internet म उसे Online lead generation कहा जाता है.  जाता है ads को run कर, जसके लए service जैसे क Google AdWords या Bing Ads या फर directly purchasing कया जाता है advertising space को सरे websites पर.

Advertisers चुन सकते ह run करना या तो CPC (cost per click) या CPA (cost per action) ads, जसम दोन ही leads generate करते ह. वैसे तो CPA और CPL (cost per lead) को असर इतमाल कया जाता है interchangeably, वह CPL specifically measure करता है lead generations, न क aggregate clicks या sales को

 Marketing Offer – Attractive / Relevant Offer

:- , Landing Page – Offer’s details with form, Conversion Page – Thank you page, Email Marketing, Video Marketing, Responsive Design, Google Analytics

4. Search Engine Optimization      (10 Periods) 

What is SEO:- यह एक ऐसी तकनीक है जिससे हम अपने वेबपजे को सर्च मे टॉप (top) मे लाते है,seo एक process है जिसका use कर के हम अपने website को organic ranking increase कर सकते है search engines मे |

Types of SEO in Hindi

SEO दो प्रकार के होते है 

1. On Page SEO 

2. Off Page SEO

1. On-Page SEO :- On page SEO का काम  website को ठीक तरह से design करना जो SEO friendly हो.

SEO के rule को follow कर अपने website मे  template का इतेमाल करना. अछे contents लिखना और उनमे अछे keywords का इतेमाल करना जो search engine मे सबसे ज्यादा खोजी जाती है.

Keywords का इतेमाल page मे सही जगह करना जैसे Title, Meta description, content म keyword का इतेमाल करना इससे Google को जानने मे  आसानी होती है कि आपका content किसके ऊपर लिखा गया है और  आपके website को Google page पर rank करने मे  मदद करता है जिससे आपके blog क traffic बढती है.

On Page SEO कैसे करे:-

 यहाँ पर हम कुछ ऐसे techniques के बारे मे जानेगे जिसकी मदद से हम अपने Blog या Website को On Page SEO अछे तरीके से कर सकगे.

1. Website Speed :-Website speed एक बहुत ही महवपूण कड़ी है SEO के कणी से. एक survey से पाया गया है कि कि सी भी Visitor ज्यादा से ज्यादा 5 से 6 seconds ही कसी blog या website पर रहता है.

अगर वो इसी समय के भीतर नही खुला तब वो उसे छोड़ दुसरे ममे Migrate हो जाता है. और ये बात Google के लिए भी लागु होती है अगर आपका Blog जल्दी नही  खुला तब एक negative signal Google के पास पँहुच जाता है कि ये blog उतनी अछ नही  है या ये ज्यादा fast नही  है. तो जितना हो सके अपनी साईट कि  रफ़्तार  अच्छी  रख.

यहाँ मने कुछ important tips दीए है जिससे आप अपनी blog या website क speed fast कर सकते है  

Simple और attractive theme का इतमाल कर ज्यादा plugins का इतेमाल न कर Image का size कम-से-कम रख W3 Total cache और WP super cache plugins का इतमाल करे 

2. Website क Navigation अपनी blog या website मे  इधर उधर जाना आसान होना चाहए जिससे कोइ भी visitor और Google को

एक पेज से दुसरे पेज मे जाने मे कोई परेशानी ना हो|

3. Title Tag

 अपनी website मे  टाइटल टैग बत ही अछा बनाए जिससे कोइ भी visitor उसे पढ़े तो उसे जल्दी  से जल्दी आपके टाइटल पर Click कर दे इससे आपका CTR भी increase होगा.

कैसे बनाय अछे Title Tag : – अपने Title मे  65 word से ज्यादा  Words का इतमाल न करे  Google 65 words के बाद google searches मे  title tag show नही करता है.

4. Post का URL कैसे लिख हमेशा अपने post का url आप जितना simple और छोटा हो सके उतना रख.

5. Internal Link ये अपने Post को rank करने के लए एक बेहतरीन तरीका है. इससे आप अपने Related Pages को एक सरे के साथ Interlinking कर सकते है . इससे आपके सभी Interlinked pages आसानी से rank हो सकते है 

6. Alt Tag अपने Website के post म images का इस्तेमाल जरूर करे क्यो images से आप बत सारा traffic पा सकते ह इसलए image को इतमाल करते समय उसम ALT TAG लगाना ना भूले.

7. Content, Heading और keyword Content के बारे मे  जैसे क हम सभी जानते है कि ये बात ही महवपूण कड़ी है. क्योकि  Content को King भी कहा जाता है और जतनी अछ आपका  Content होगी उतने अछे site क valuation होगी. इसलए कम से कम 800 words से यादा words के Content लिखे 

Heading:  अपने Article के Headings इससे SEO पर काफ impact पड़ता है. Article का Title तो H1 होता है और इसके बाद के Sub headings को आप H2, H3 इयाद से नामांकत कर सकते है  इसके साथ आप focus keyword का जरूर इस्तेमाल करे.

Keyword : आप Article लिखते समय LSI Keyword का इस्तेमाल करे . इससे आप लोग के Searches को आसानी से link कर सकते है  इसके साथ important keywords को BOLD कर जससे क Google और Visitors को ये पता चले क ये जरी Keywords ह और उनका ध्यान इसके तरफ आकर्षीत होगा |

2. Off-Page SEO

Off page SEO का सारा काम blog के बाहर होता है. Off page SEO मे हमे अपने blog का promotion करना होता है जैसे बहुत से popular blog म जाकर उनके article पर comment करना और अपने website का link submit करना इसे हम backlink कहते है . Backlink से website को बहुत फायेदा होता है.

Social networking site जैसे Facebook, twitter, Quora पर अपने website का attractive page बनाइये और अपने followers बढाइये इससे आपके website मे ज्यादा  visitors बढ़ने के chances होते है .

बड़े बड़े blogs मे जो बहुत  ही मसहुर है उनके blog पर guest post submit करीए इससे उनके blog पे आने वाले visitors आपको जानने लगगे और आपके website पर traffic आना शुरु  हो जायेगा.

1.  Search Engine Submission: अपनी वेबसाइट को सही तरीके से सारे सच इंजन मे submit करना चाहिए 

2.  Bookmarking: अपनी blog या website के page और post को Bookmarking वाली वेबसाइट म submit करना चाहिए

3.Directory Submission : अपनी blog या website को popular high PR वाली Directory म submit करना चाहिए 

4.Social Media: अपनी blog या website का page और Social Media पर Profile बनाना चाहिए और अपनी वेबसाइट का link Ad कर दो like फेसबुक, गूगल+, twitter, LinkedIn

5.Classified Submission: Free Classified Website म जाकर अपनी वेबसाइट का  मे advertise करना चाहिए

6.  Q & A site: आप question and answer वाली वेबसाइट म जाकर कोई भी question कर सकते हो और अपनी साईट का लक लगा सकते है 

7.  Blog Commenting : अपने Blog से Related लॉग पर जाकर उनके पोस्ट मे कमेंट कर सकते है  और अपनी website का link लगा सकते हो (link वही लगाना चाहए जहाँ website लिखा होता है)

8.  Pin : आप अपनी Website के image को pinterest पर पोट कर सकते ह यह एक बहुत अछा तरीका है traffic increase करने का.

9.  Guest Post: आप अपनी वेबसाइट से Related लॉग पर जाकर Guest Post कर सकते है  यह सबसे अछा वे है जहाँ से आप do-follow link ले सकते ह और वो भी बलकुल सही तरीके से

Why SEO:- क्योकि 90 % से ज्यादा लोग जब गूगल जैसे सर्च इंजन पर कुछ search  करते है तो सिर्फ first  page पर आयी हुई websites  को ही visit  करतें  है।  बहुत कम लोग ही second page  तक जाते  हैं।

  • हमारी website  या blog पर traffic  increase करने  के लिये SEO करना जरुरी है।
  • SEO करके हम बिना  Google को पैसे दिये  top page पर आ सकते है।
  • आज कल किसी भी चीज के बारे में जानना हो तो लोग सबसे पहले google  पर search  करते हैं।

How Search Engine works:- आप search करते हो “what is seo” तो Search engine पहले से ही crawl और index की हुई Ranking list को आपके सामने ले आता है। जिसे search engine के bots और spider लगातार 24 hours crawl और index करके अपनी Ranking list बना लेते है। और जैसे ही आप कुछ सर्च करते है तो वह आपको search engine Result Page(SERP) पर दिखाई देती है।

search engine तीन step में काम करता है।

1. Crawling
2. Indexing
3. Ranking

Crawling :-Crawling  एक websites के सारे डाटा को अधिग्रहण  करना या एक websites क पूरी जानकारी को हासील करना. इस process मे website को scan करना, page का title या  keywords की जानकारी, content मे  कितने keywords है , images और कौन कौन से page मे link है  website के साथ. लेकन आजकल के Modern crawler मे सायद तक एक webpage के पुरे cache को ही copy कर लेते ह. इसके साथ साथ पेज layout कैसा है, Advertise कहाँ कहाँ है , link कहाँ दिये गए है  ये भी Store होता है

01.png

2. Indexing:-  indexing एक process है  जहाँ Crawl के दौरान जो भी डाटा मिलता है उन सभी डाटा को database मे place करना है. example आपके पास बोहत सारी books है . आप उन books के author name, books name, books के हर page को read करना Crawling है लेकन इन सब details को Listing करना ही Indexing है 

00.png

00.png

Essential SEO guidelines for website owner, designer, blogger and content writer :

 Keyword Research :- Keyword Research एक ऐसा Process है जिसकी Help से हम सर्च इंजन पे सब से ज़्यादा Search किये जाने वाले Term को Search करने के लिए Researching करते है ताकि इन Popular Search Terms को हम अपने Content में Add करके Search Engine में High-Rank Gain कर सके|

Backlink:  इसके inlink या simply link भी कहा जाता है, ये एक hyperlink होता है किसी दुसरे website मे जो क आपके Website के तरफ इशारा करता है. Backlinks seo के नज़रए से बत ही महवपूण होता है, क्योकि ये किसी भी Webpage कि Search Ranking को directly influence करता है.

 PageRank: PageRank एक algorithm है जसे क Google इस्तेमाल करता है ये अनुमान लगाने लिए की Web मे कोन कोन सी Relative important pages स्थित है 

Anchor text:  किसी भी backlink का Anchor Text के प्र कार का text होता है जो क clickable होता है. यदी आपके Anchor Text मे आपका Keyword मौजुद है तब तो ये आपको SEO कि द्रीष्टि से भी काफी  मदद करेगा. 

Title Tag:  Title Tag मुख्य रुप से किसी भी Web Page का Title होता है और ये बहुत ही महवपूण factor है Google’s Search Algorithm के लिए. 

Meta Tags:  Title Tag के जैसे ही Meta Tag का इतमाल से Search Engines को ये पता चलता है कि  Pages मे content मे स्थित है. 

Search Algorithm:  Google’s search algorithm क मदद से   हम ये पता कर सकते है  कि  Internet मे  कोन सी Web Pages relevant है . लगभग 200 algorithms काम करती ह Google के Search Algorithm मे . 

SERP:  इसके full form  Search Engine Results Page. ये basically उही pages को show करता है जो क Google Search Engines के हसाब से Relevant है Keyword Density:  ये Keyword Density से ये पता चलता है कि  कितनी बार कोई भी Keyword article मे  कितनी बार इतमाल कि  गयी है . Keyword Density SEO कि द्रीष्टि से काफी  महवपूण है. 

Keyword Stuffing:  जैसे क मने पहले ही कहा क Keyword Density SEO की द्रीष्टि से काफ महवपूण है लेकन अगर कोई Keyword को जरूरत  से ज्यादा  इस्तेमाल किया जाये तो उसे Keyword Stuffing कहते है . ये Negative SEO कहलाता है  क्योकि  इससे आपके Blog पर ख़राब असर पड़ता है.

 Robots.txt:  ये ज्यादा  कुछ नही बस एक File होती है जिसे कि  Domain के Root मे  रखा जाता है. इसके इतमाल से search बोट्स को ये सूचत किया जाता है कि  Website की  Structure कैसी है|

Google Trends:- Google Trend एक टूल है जो समय के साथ होने वाले हर बदलाव को रिकार्ड करता है और उसे ग्राफ के रूप मे हमे दिखाता है ये टूल हमे ये भी बताता है की कौन से keyword कितनी बार लोगो ने और कौन कौन से लोकेशन से सर्च किया है इससे हुमे ये जानने मे मदत मिलता है उस keyword को इस्तेमाल करने से हमे फायदा होगा या नहीं |

Google Trend Tool कै से Use करे?

Step1: सबसे पहले आपको https://trends.google.com/trends की वेबसाइट पर जाना है.

Step2: अब आपके सामने Google Trends वेबसाइट ओपन हो जाएगी।

1. ऊपर search box  मे अपने keywords को type करने के बाद आपको पता चल जायेगा की वो कीवड इस समय कितना सच हो रहा है.

 2. All Catagories पर क्लिक करके आप अपनी catagories के हिसाब से भी Google search trend के बारे म पता कर सकते हो. 

3. आप अपने Country के हिसाब से भी trends keywords पता कर सकते हो.

Step3: मने यहां पर Catagories or Country के हिसाब से चेक किया है..

g0.png

Step4: अब आप देख सकते हो की India मे  Science or Technology मे  Search Trend मे  क्या  चल रहा है. g1.png

Step5: आप Stories पर क्लिक  करके उसके बारे मे और भी बहुत  से डिटेल पता कर सकते हो. जैसे: top articles, interest, top queries or more

Local SEO :-

local.jpg

ये दो शब्दो से मिलकर बना  है Local + SEO. Local यानि की किसी local audience को ध्यान मे  रखकर किया जाने वाला SEO को Local SEO कहा जाता है.

यह एक ऐसे technique है जिसम की  आपकी  website या blog को ख़ास तोर से optimize किया जाता है जिससे की search engine पर बेहतर rank करे एक local audience के लिए 

वैसे एक website की  मदद से आप पुरे internet को target कर सकते ह, वह अगर आपको एक paticular locality को ही target करना है तब इसके लए आपको Local Seo का इतमाल करना होगा.

 यहाँ पर आप केवल अपने ही किसी local area को ही target करते है  और उसी हसाब से आपके site को seo optimized करते है  तब इस प्रकार के SEO को “local SEO” कहा जाता है.

SEO-friendly Domain Name:-जब भी आप domain खरीदे तो सबसे पहले top level domain लेना चाहिए google इसे ज्यादा महत्व देता है किसी भी डोमेन के लेवल को right to left की ओर से समझा जाता है सर्च इंजिन मे टॉप लेवल डोमेन का ज्यादा महत्व है और ये seo friendly होते है