Physical design of IoT in hindi

Physical Design of IoT in Hindi

IoT के physical design के अंतर्गत दो चीजें आती है जो कि निम्नलिखित हैं:-

  1. Things

  2. IoT Protocols

Things –

IoT में Things को IoT devices कहा जाता है और प्रत्येक device की एक unique identity (अलग पहचान) होती है. इन devices का कार्य remote sensing, actuating, और monitor करना आदि होता है.

IoT devices बहुत प्रकार की होती हैं जैसे कि – sense करने वाली डिवाइस, smart watch (स्मार्ट घडी), smart electronic appliances (स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरण), wearable sensors (पहनने योग्य सेंसर), automobiles, और industrial machine (औद्योगिक मशीन).

ये devices डाटा को जनरेट करती हैं और उसके बाद इस data को data analytics system के द्वारा उपयोगी information में बदल दिया जाता है.

उदाहरण के लिए – temperature को मापने वाली device एक IoT device है. यह मौसम और जगह के आधार पर तापमान को मापती है.

IoT device निम्नलिखित कार्य कर सकती है:-

  • यह दूसरी connect हुई devices के साथ data को ट्रान्सफर करता है.
  • यह दूसरी devices से data को collect करता है और data को locally प्रोसेस करता है.
  • ये data को process करने के लिए centralized servers या cloud पर आधारित applications को भी send कर सकता है.

नीचे चित्र में, IoT devices का एक block diagram दिया गया है.

iot devices block diagram in hindi

एक IoT device में दूसरे devices से connect करने के लिए बहुत सारें interfaces होते हैं. इसमें wired और wireless दोनों प्रकार के interfaces होते हैं:-

  • sensors के लिए I/O interface.
  • internet connectivity के लिए interface.
  • memory और storage interface.
  • audio/video interfaces.

IoT Protocols –

IoT protocols की मदद से ही internet में IoT devices और cloud पर आधारित servers के मध्य communication हो पाता है. नीचे आपको इसका चित्र दिया गया है जिसमें सभी IoT protocols दिखाए गये हैं:-

IoT protocols in hindi

Link Layer (लिंक लेयर) –

यह layer यह निर्धारित करती है कि network में data को physically कैसे भेजा जाता है. यह लेयर यह भी निर्धारित करती है कि हार्डवेयर डिवाइस के द्वारा packets को कैसे code और signal किया जाता है. इसके अंतर्गत निम्नलिखित protocols का प्रयोग किया जाता है:-

Network Layer (नेटवर्क लेयर) –

यह लेयर source network से destination network तक IP datagrams को भेजने के लिए जिम्मेदार रहती है. इस लेयर का कार्य host addressing और packet routing का होता है. हम IPv4 और IPv6 का प्रयोग host को identify करने के लिए करते हैं. इसमें प्रयोग किये जाने वाले protocols निम्नलिखित हैं:-

  • IPv4
  • IPv6
  • 6LoWPAN

Transport Layer (ट्रांसपोर्ट लेयर) –

इस लेयर का कार्य error control, segmentation, flow control और congestion control का होता है. इस layer के अंदर निम्नलिखित protocols शामिल रहते हैं:-

Application Layer (एप्लीकेशन लेयर) –

यह लेयर user को कम्युनिकेशन उपलब्ध कराती है; जैसे:- वेब ब्राउज़र, ई-मेल, तथा अन्य applications के द्वारा। इस layer में निम्नलिखित protocols प्रयोग किये जाते हैं.

    • HTTPS
    • CoAP
    • WebSocket
    • MQTT
    • XMPP
    • DDS
    • AMQP

Introduction to IoT ( I0T का परिचय )

I0T का परिचय (Introduction to loT)

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) भौतिक वस्तुओं या लोगों का एक नेटवर्क है जिसे “things” कहा जाता है जो सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, नेटवर्क और सेंसर के साथ एम्बेडेड होते हैं, जो इन वस्तुओं को डेटा एकत्र करने और आदान-प्रदान करने की अनुमति देता है। IoT का लक्ष्य कम्प्यूटर, मोबाइल, टैबलेट जैसे मानक उपकरणों से इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार करना है, अपेक्षाकृत टोस्टर जैसे अपेक्षाकृत बिना आवाज वाले उपकरणों के लिए।
IT डेटा संग्रह, एआई एल्गोरिथ्म (Alalgorithm) और नेटवर्क की शक्ति के साथ हमारे जीवन के पहलओ में । सधार करके लगभग सब कुछ स्मार्ट बनाता है। IoT में चीज एक डायबिटीज मॉनिटर इम्प्लांट रखने वाला व्यक्ति भी हो सकता है, आदि

 

IoT का इतिहास (History of IoT) •

1970 कनेक्टड उपकरणों का वास्तविक विचार प्रस्तावित किया गया था।
1990-जॉन रोमको ने एक टोस्टर बनाया, जिसे इंटरनेट पर चालू बंद किया जा सकता था।

1995-सीमेंस ने MDM के लिए निर्मित पहला सेलुलर मॉड्यूल (cellular module) पेश किया।

1999-‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (Internet of Things) शब्द का उपयोग केविन एश्टन द्वारा अपने काम के दौरान
किया गया था। जिसे व्यापक रूप से स्वीकार किया गया।

• 2004-इस शब्द का उल्लेख प्रसिद्ध प्रकाशनों जैसे गार्जियन, बोस्टन ग्लोब और साइंटिफिक अमेरिकन में किया
गया।

• 2005-यूएन के अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) ने इस विषय पर अपनी पहली रिपोर्ट प्रकाशित की।

• 2008-इंटरनेट ऑफ थिग्स (Internet of Things) का जन्म हुआ।

• 2011-मार्केट रिसर्च कंपनी, गार्टनर ने अपने शोध में इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ तकनीक को शामिल किया।

loT कैसे कार्य करता है? (How loT Works?)

संपूर्ण IoT प्रक्रिया स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे टीवी, वशिंग मशीन जैसे उपकरणों से शुरू होती है जो आपको IoT प्लेटफॉर्म के साथ संवाद करने में मदद करती है।