Difference between IoT and M2M in hindi

Difference between IoT and M2M in Hindi

IoT और M2M के बीच के अंतर (difference) को हम नीचे दी गयी table के द्वारा आसानी से समझ सकते हैं:-

अंतर का आधार IoT M2M
फुल फॉर्म इसका पूरा नाम internet of things है. इसका पूरा नाम machine to machine है.
कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल इसमें communication के लिए internet protocol का प्रयोग किया जाता है जैसे कि – HTTP, FTP और Telnet आदि. इसमें कम्युनिकेशन के लिए traditional (परंपरागत) protocols और communication techniques का प्रयोग किया जाता है.
Intelligence (बुद्धिमत्ता) IoT devices के पास ऐसे objects होते हैं जिनके द्वारा decision making की जाती है अर्थात् ये devices निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार होती है. M2M डिवाइसों की intelligence (बुद्धिमत्ता) IoT devices की तुलना में कम होती है. इनमें सीमित (limited) मात्रा की ही इंटेलिजेंस होती है.
Connection Type (कनेक्शन का प्रकार) इसमें connection के लिए network का प्रयोग किया जाता है. यह cloud connection को support करता है. यह point to point connection को support करता है.
Scope इसका scope बहुत बड़ा होता है क्योंकि इसमें बहुत सारीं devices कनेक्ट हो सकती हैं. इसका scope छोटा होता है क्योंकि इसमें limited संख्या में ही devices connect हो सकती हैं.
Internet इसमें communication के लिए internet की जरूरत होती है. इसमें devices इन्टरनेट पर निर्भर नहीं रहती हैं. अर्थात् इसमें internet की आवश्यकता नहीं होती.
Data Sharing IoT में, collect किये हुए data को दूसरे applications के साथ share किया जाता है. Share करने से user experience बेहतर होता है. M2M में, डाटा को दूसरे applications के साथ share नहीं किया जाता है. इसमें केवल comunicating parties को ही डाटा share किया जाता है.
Business Type इसमें business का प्रकार Business to Business (B2B) और Business to Consumer (B2C) होता है. इसमें केवल Business to Business (B2B) होता है.
API support यह open API को support करता है. यह open API को support नहीं करता है.
उदाहरण Big Data, Cloud, और Smart wearables आदि. Sensors, data और information आदि.

sensors and actuators in hindi by jayho

सेंसर (SENSOR) और एक्चुएटर सेंसर (Sensor) IoT डेटा के मुख्य स्रोत है। हम कह सकते हैं कि सेंसर (Sensor) ट्रांसड्यूसर है जो ऊर्जा के एक रूप को दूसरे रूप में परिवर्तित करता है। सेंसर (Sensor) कुछ भौतिक परिवर्तनों और इसके अवलोकन को विद्युत संकेतों में परिवर्तित करता है और यह रीडिंग के रूप में आउटपुट के रूप में आएगा। तापमान संवेदक पर्यावरण के भौतिक व्यवहार को प्राप्त करता है और विद्युत आवेग को पढ़ने में परिवर्तित करता है। _ जबकि एक्चुएटर्स सेंसर (Sensor) की रिवर्स दिशा में काम करते हैं यह इनपुट के रूप में विद्युत आवेग लेता है और इसे संसाधित करता है और भौतिक क्रिया में बदल जाता है। इलेक्ट्रिक मोटर, हाइड्रोलिक सिस्टम एक्चुएटर्स का उदाहरण है।

एक विशिष्ट IoT प्रणाली में तीन स्तर के संचार होते हैं: 1. सेंसर (Sensor) जानकारी एकत्र करता है और इसे अगले स्तर तक ले जाता है। 2. कंट्रोल सेंटर सेंसर (Sensor) से जानकारी प्राप्त करता है और अगले स्तर तक कमांड भेजता है। 3. एक्चुएटर्स कंट्रोल सेंटर द्वारा प्राप्त कमांड पर काम करता है।
sensors and actuators 

Introduction to the many ‘end devices’ in hindi by jayho

अत उपकरण (End Devices) नेटवर्क सिस्टम में एक स्रोत या गंतव्य डिवाइस को अंत डिवाइस के रूप में जाना जाता है। उदाहरण के लिए, एक उपयोगकर्ता का PC एक अंत डिवाइस है, और इसलिए एक सर्वर है। IoT उपकरणों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है
1. लो-एंड IoT डिवाइस 2. मिडिल-एंड IoT डिवाइस
3. हाई-एंड IoT डिवाइस।

1. लो-एंड IoT

डिवाइसेस लो-एंड IoT डिवाइस वे डिवाइस हैं जो संसाधनों के संदर्भ में constrained है। शब्द constrained उपकरणों को जुड़े उपकरणों के एक समूह को परिभाषित करने के लिए पेश किया गया था जो संसाधन चुनौती हैं। लिनक्स या Windows 10 IoT Core जैसे पारंपरिक Os को चलाने के लिए संसाधनों के मामले में लो-एंड IoT डिवाइस बहुत constrained हैं। उनकी रेडम एक्सेस मेमोरी (RAM) और फ्लैश दसियों या सैकड़ों किलोबाइट के हैं और प्रोसेसिंग यूनिट 8-बिट या 16-बिट आर्किटेक्चर के साथ कुछ अत्याधुनिक उपकरणों के साथ 32-बिट आर्किटेक्चर का समर्थन करती है। इन उपकरणो को प्राथमिक रूप से बेसिक सेसिंग और एक्चुएटिग अनुप्रयोगों के लिए निर्मित किया जाता है, और या तो निम्न स्तरीय फर्मवेयर या बहुत कम कार्यक्षमता वाले Wireless Sensor Networks (WSN) OS का उपयोग करके प्रोग्राम किया जाता है। लो-एंड IoT डिवाइस का एक उदाहरण OpenMote-B और Atmel SAMRPI Xplained-Pro ही ये उपकरण विभिन्न IoT अनुप्रयोगों में शामिल किए गए हैं।

2. मिडिल-एड IT

डिवाइस मिडिल-एंड IT डिवाइस एक उच्च-अंत ICT डिवाइस की तुलना में कम constrained संसाधनों वाले डिवाइस हैं, लेकिन लो-एंड IoT डिवाइस के विपरीत अधिक प्रोसेसिंग क्षमताओं के साथ अधिक सुविधाएँ प्रदान करते हैं। मध्य-अंत IoT डिवाइस में कुछ प्रसंस्करण क्षमताएं हैं जैसे निम्न-स्तरीय कम्प्यूटर विज़न एल्गोरिदम चलाकर image को recognise करना। इसके अलावा, मध्यम-अत वाले IoT डिवाइस कम-अंत वाले उपकरणों के विपरीत एक से अधिक संचार तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं। इस श्रेणी के उपकरणों में आमतौर पर सैकड़ों मेगाहर्ट्ज और KB की रेंज में उनकी Clock Speed और RAM होती है, क्रमशः कम-अंत वाले उपकरणों की तुलना में, जिनकी घड़ी की गति और RAM क्रमशः मेगाहर्ट्ज और KB में हैं। मध्यम अंत का उदाहरण IoT उपकरणों हैं: Arduino Yun, Netduino उपकरणों आदि।


3. हाई-एंड IoT

डिवाइस हाई-एंड IoT डिवाइस डिवाइस होते हैं, ज्यादातर सिंगल बोर्ड कम्प्यूटर जिनमें पर्याप्त संसाधन होते हैं, जैसे कि एक शक्तिशाली प्रोसेसिंग यूनिट, बहुत सारी RAM और एक संभावित ग्राफिकल प्रोसेसिंग यूनिट के साथ एक संभावित उच्च भंडारण मात्रा, एक पारंपरिक OS चलाने के लिए लिनक्स के रूप में, विंडोज 10 IoT Core अदि। इसके अलावा, ये डिवाइस भारी मशीन लर्निंग एल्गोरिदम को निष्पादित करने जेसे अस्थायी संगणना कर सकते हैं। इस तरह के उपकरण का एक उदाहरण Raspberry Pi है। इन उपकरणों सहित अपने पर बोर्ड कनेक्टिविटी के लिए प्रसिद्ध है FAST Ethernet/ Giga Ethernet इंटरफेस, Wi-Fi/BT चिपसेट, HDMI out इंटरफ़ेस, एक से अधिक पूर्ण USB 2.0 पोर्ट। इसके
46 इंटरनेट ऑफ थिंग्स अलावा, मल्टीमीडिया अनुप्रयोगों के बढ़ते उपयोग के साथ, इनमें से अधिकांश डिवाइस कैमरा इंटरफेस जैसे कैमरा सीरियल इंटरफेस (CSI) और डिस्प्ले सीरियल इंटरफेस (DSI) के साथ आते हैं।

Resistor in hindi by jayho

What is Resistor (प्रतिरोधक क्या होता है)

resistor को हिंदी में प्रतिरोधक कहा जाता है। यह इलेक्ट्रिकल का ऐसा उपकरण है, जिसकी मदद से हम करंट को कंट्रोल कर सकते है। अगर हम रेसिस्टर की परिभाषा को देखतें है, तो उसमे भी यही लिखा होता है।
Resistor एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो करंट के बहने की स्पीड को कम करता है।

Resistor working (resistor कैसे काम करता है)

इसको समझना काफी आसान है। अगर आप इलेक्ट्रिकल फील्ड में ही काम कर रहे है। तब हमें यह पता है की कई चीज़े ऐसी होती है, जिसमे करंट नही गुजर पाता है। जैसे- कोई लकड़ी या प्लास्टिक।

लेकिन कुछ पर्दाध ऐसे होते है, जिनमे काफी आसानी से करंट फ्लो हो जाता है, जैसे- कॉपर, अलुमिनियम। इनमे आसानी करंट से गुजर जाता है, इसलीए इनको हम वायर के लिए उपयोग लेते है।

अभी हमको सिर्फ यह याद रखना है। जिन चीज़ों में से करंट गुजर जाता है, उसको हम कंडक्टर कहते है। और जो करंट चीज़े को बहने नही देते, उसको हम इंसुलेटर कहते है।

अब हमे यह पता चल गया है की, कंडक्टर हमारे करंट के बहने का एक रास्ता होता है। और अगर हम इस करंट के रास्ते को खराब कर दे, तो करंट को गुजरने में मुश्किल होगी जिसके कारण करंट की स्पीड कम हो जाएगी। तो यही चीज़ रेसिस्टर के अंदर की जाती है।

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Resistor को जब बनाया जाता है। तब सबसे पहले एक कंडक्टर वायर को लेते है, जो की हमको रेसिस्टर के दोनो साइड बाहर निकले हुए भी दिखते है। पर इस वायर को बीच में से ब्रेक मतलब तोड़ दिया जाता है। और बीच की जगह पर कार्बन को भर दिया जाता है।

Resistor में कार्बन के उपयोग के कारण करंट को गुजरने में तकलीफ होती है, और करंट की स्पीड कम हो जाती है।

What is Resistance (रेजिस्टेंस क्या होता है)

दोस्तो जब भी resistor का नाम आता है, तो साथ में resistance को भी बोला जाता है। कई लोग resistor को रेजिस्टेंस भी बोलते है, तो क्या यह सही है।

Resistance का मतलब- सबसे पहले आपको एक बात यह पता होनी चाहिए की रेजिस्टेंस हर एक वस्तु के अंदर होता है।

इसको समझना बहुत जरूरी है, इसके लिए आप सिर्फ यह लाइन याद कर लीजिए। किसी भी सर्किट के अंदर करंट को रोकने वाला रेजिस्टेंस होता है।

अब आपके मन में यह सवाल आया होगा की करंट को resistor रोकता या फिर resistance?

जवाब- resistor एक उपकरण का नाम है, जैसे- मोबाइल, TV इस तरह से रेसिस्टर भी एक उपकरण है। पर इसके अंदर जो करंट को रोकता है वह रेजिस्टेंस है।

अगर आप कभी Resistor को दुकान पर लेने जाते है, तो आपसे पूछा जाएगा की कितने रेजिस्टेंस का रेसिस्टर चाहिए? या फिर कितने Ohm का रेजिस्टेंस चाहिए?

मतलब- रेसिस्टर एक उपकरण का नाम है, और रेजिस्टेंस उसके अंदर की वैल्यू।

What is Ohm (ओम क्या होता है)

दोस्तो जैसा की मैंने आपको बताया था की हम कंडक्टर के बीच में कार्बन को डाल देते है, और resistor बन जाता है।

पर दोस्तो हमे कितने करंट को कम करना है, उस अनुसार ही कार्बन को डाला जाता है। जैसे कोई जगह है, वहाँ पर हमको करंट की मात्रा को कुछ ही कम करना है, तो हम कम कार्बन का उपयोग resistor में करेंगे, मतलब हम कम resistance का प्रतिरोधक लगाएँगे।

और यह जो resistance होता है, इसको हम Ohms में पता करते है, जिस तरह हम वजन को Kg में बोलते है। अगर हमें ज्यादा करंट को सर्किट में कम करना है, तो हम ज्यादा ohm का रेसिस्टर लाकर लगा देंगे।

Resistance और Ohm में अंतर– यह दोनो एक ही चीज़ है, बस हम रेजिस्टेंस की वैल्यू को Ohm(Ω) में लिखते है।

Why Resistor are used (प्रतिरोधक क्यों लगाते है)

दोस्तो हमारे सभी इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की एक ताकत होती है, की वह ज्यादा से ज्यादा कितने करंट को सहन कर सकते है। अगर उस उपकरण की ताकत से ज्यादा करंट उसमे चला जाता है तो वह पूरी तरह से खराब हो जाएगा।

उदाहरण- हमारे पास कोई LED बल्ब है, और हमे उसको स्टार्ट करना है। इसके लिए सबसे पहले हम उस उपकरण पर चेक करेंगे की वह कितने करंट और वोल्टेज के लिए बना है।

अब अगर हमारे पास LED की कैपेसिटी से ज्यादा की बैटरी है, तो हम बीच में एक resistor का उपयोग कर लेंगे ताकि बैटरी से निकलने वाले एक्स्ट्रा करंट को resistor रोक दे, और हमारी LED आसानी से चल जाए।

Resistor Definition- resistor is an electrical component. That limits or regulates the flow of electrical current in an electronic circuit.

प्रतिरोधक की परिभाषा- रेसिस्टर एक इलेक्ट्रिकल का एक ऐसा component है, जो की इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में बहने वाले करंट को कंट्रोल करता है।

Resistor Types (रेसिस्टर के प्रकार)

Resistor दो प्रकार के होते है।

  1. Fix resistor (फिक्स रेसिस्टर)
  2. Variable Resistor (वेरिएबल रेसिस्टर)

Fix Resistors- इस प्रकार के रेसिस्टर में हम resistance की वैल्यू को कम ज्यादा नही कर सकते है।

Variable Resistor- इस प्रकार के रेसिस्टर में हम रेजिस्टेंस की वैल्यू को जरूरत के अनुसार कम ज्यादा कर सकते है।

Resistor की वैल्यू को कैसे पता करते है?

दोस्तो इसके लिए हमारे पास दो तरीक़े होते है।

  1. Multi meter की सहायता से
  2. Resistor के ऊपर बने color code की मदद से

मल्टीमीटर से resistance की वैल्यू को निकालना काफी आसान है, इसके लिए आपको सिर्फ multi-meter को Ohm(Ω) पर सेट करना है। और दोनो मल्टीमीटर की लीड को रेसिस्टर से जोड़ देना है।

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Tri-color LED in hindi by jayho

त्रि रंग LED

(Tri-color LED) त्रि रंग LED सिर्फ एक पैकेज में तीन LED का एक संयोजन है: एक लाल, एक हरा और एक नीला LEDI RGB LED द्वारा निर्मित रंग तीन LED रंगों का एक संयोजन है। आम एनोड और कॉमन कैथोड RGB LED हैं।
त्रि रंग LED को RGB LED के रूप में भी जाना जाता है। ऊपर की छवि में आप स्पष्ट रूप से एक सामान्य लीड (एनोड या कैथोड) के साथ चार लीड व्यवस्था और प्रत्येक रंग के लिए अतिरिक्त लीड देख सकते हैं। RGB LED के इन तीन रंगों को मिलाकर हम कई अलग-अलग रंगों का उत्पादन कर सकते हैं और प्रत्येक LED की तीव्रता को कॉन्फिगर करके इसे प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण चित्र 2.13 Tri-color LED के लिए, विशुद्ध रूप से नीली रोशनी का उत्पादन करने के लिए, आप नीले LED को उच्चतम तीव्रता और हरे और लाल LED को सबसे कम तीव्रता पर सेट करेंगे। एक सफेद रोशनी के लिए, आप सभी तीन LED को उच्चतम तीव्रता पर सेट करेंगे।
अन्य रंगों का उत्पादन करने के लिए, आप तीन रंगों को अलग-अलग तीव्रता में संयोजित कर सकते हैं। प्रत्येक LED की तीव्रता को समायोजित करने के लिए आप PWM सिग्नल का उपयोग कर सकते हैं। क्योंकि LED एक-दूसरे के बहुत करीब हैं, हमारी आँखें व्यक्तिगत रूप से तीन रंगो के बजाय रंगों के संयोजन का परिणाम देखती हैं।.